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वाराणसी पहुंचे एक्‍टर अनुपम खेर, नरसंहार में मारे गए कश्मीरी पंडितों के लिए किया त्रिपिंडी श्राद्ध कर्म

Updated at : 15 Jun 2022 4:37 PM (IST)
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वाराणसी पहुंचे एक्‍टर अनुपम खेर, नरसंहार में मारे गए कश्मीरी पंडितों के लिए किया त्रिपिंडी श्राद्ध कर्म

फिल्म अभिनेता अनुपम खेर सहित देश के अलग-अलग राज्यों से आए विद्वान और संत इस विशेष अनुष्ठान के साक्षी बनेंगे. सामाजिक संस्था आगमन और ब्रह्म सेना के संयुक्त तत्वावधान में इस विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया. अनुष्ठान में उन कश्मीरी ब्राह्मणों के परिजन भी शामिल हुए जिन्होंने अपनों को गंवाया है.

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Varanasi News: काशी के पिशाच मोचन तीर्थ पर बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कश्मीर में मारे गए हिंदुओं की आत्मा की शांति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध कर्म का आयोजन हुआ. फिल्म अभिनेता अनुपम खेर सहित देश के अलग-अलग राज्यों से आए विद्वान और संत इस विशेष अनुष्ठान के साक्षी बनेंगे. सामाजिक संस्था आगमन और ब्रह्म सेना के संयुक्त तत्वावधान में इस विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया. अनुष्ठान में उन कश्मीरी ब्राह्मणों के परिजन भी शामिल हुए जिन्होंने अपनों की जान इस हादसे में गंवाई थी.

1990 से शुरू हुए इस नरसंहार में…

कश्मीर में हुए नरसंहार में हिंदुओं की निर्मम हत्या हुई थी. 1990 से शुरू हुए इस नरसंहार में सैकड़ों हिंदू मारे गए. घटना के तीन दशक बाद मोक्ष की नगरी काशी में इन्हीं मृत हिंदुओं के आत्मा की शांति के लिए विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया गया. सामाजिक संस्था आगमन और ब्रह्म सेना के संयुक्त तत्वावधान में इसका विशेष अनुष्ठान सम्पन्न हुआ. अनुष्ठान में संस्था के संस्थापक डॉ संतोष ओझा ने मुख्य जजमान रहे. काशी के विद्वान ब्राह्मणों के उपस्थिति में ये अनुष्ठान संपन्न हुआ. इस अनुष्ठान का आचार्यत्व पण्डित श्रीनाथ पाठक उर्फ रानी गुरु ने किया. उनके साथ 11 ब्राह्मण भी इस अनुष्ठान में शामिल रहे.

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‘मीड‍िया कश्‍मीर को खुलकर प्‍लेटफॉर्म दे’

अभिनेता अनुपम खेर ने कहा, ‘आज का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि मैं कश्मीर में मारे गए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए आया हूं. कश्मीर के हालात आज भी कश्मीरी पंडितों के लिए अच्छे नहीं हैं. मगर इसके साथ एक और सच्चाई है कि अभी भी वहां 8 लाख लोग पर्यटन के लिए गए हुए हैं. ये दोनों बात अलग-अलग है क्योंकि आज भी वहां कश्मीरी हिंदुओं को पकड़-पकड़कर मारा जा रहा है. मैं सभी से हाथ जोड़कर विनती करना चाहता हूं कि हाईलाइट होने के लिए बेतुके प्रश्न पूछने से मीडिया को बचना चाहिए.’ उन्‍होंने कहा कि विस्थापन का प्रयास कर रहे कश्मीरी हिंदुओं का साथ मीडिया को देना चाहिए. सिर्फ मीडिया ही नहीं पूरे भारतवर्ष को साथ देना चाहिए क्योंकि 32 साल तक न तो मीडिया ने न पॉलिटिशियन ने और न ही देश की जनता ने उनका साथ दिया. अब मीडिया को कश्मीर में हो रही घटनाओं को खुलकर अपने चैनलों और प्लेटफॉर्म पर दिखाना चाहिए. सिर्फ कश्मीर में हिंदू ही नहीं बल्‍क‍ि कई ऐसे मुस्लिम भी मारे जा रहे हैं जो देश के बारे में सोचते हैं.

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अतृप्त आत्माओं को मुक्ति मिल जाती है…

श्राद्धकर्ता डॉ संतोष ओझा ने बताया कि कश्मीर में हुए नरसंहार में न जाने कितने ऐसे परिवार थे जिनका श्राद्ध तक नहीं हुआ. सनातन धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, ऐसी अकाल मृत्यु के उपरांत मृतक आत्मा की शांत‍ि और मुक्ति के लिए विशेष श्राद्ध अनिवार्य होता है. इसी के निमित शास्त्रोक्त विधि से पिशाच मोचन तीर्थ पर त्रिपिंडी श्राद्ध किया गया है. पूरी दुनिया में काशी ही एक मात्र ऐसा स्थान है जहां ये अनुष्ठान किया जाता है और सनातन धर्म में ऐसी मान्यता भी है कि पिशाच मोचन पर इस अनुष्ठान से ऐसी अतृप्त आत्माओं को मुक्ति मिल जाती है. इस पूरे आयोजन में हरियाणा के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार अमित आर्या, ऑल इंडिया होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन नागराले और समाजसेवी अरविंद सिंह की विशेष उपस्थिति रही. सभी विशेष अतिथियों ने कश्मीर में मारे गए हिंदुओं की आत्मा की शांत‍ि की प्रार्थना की और उन्हें पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.

रिपोर्ट : विपिन स‍िंह

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