बुखारी को हटाने की याचिका पर तीन हफ्ते का समय
Updated at : 07 Nov 2014 7:28 PM (IST)
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लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनउ पीठ ने मौलाना अहमद बुखारी का दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम के तौर पर मनोनयन खारिज करने के लिये दायर याचिका पर याची को इस मस्जिद के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी दाखिल करने के लिये तीन हफ्ते का समय दिया है. न्यायमूर्ति वी. के. शुक्ला […]
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लखनऊ: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनउ पीठ ने मौलाना अहमद बुखारी का दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम के तौर पर मनोनयन खारिज करने के लिये दायर याचिका पर याची को इस मस्जिद के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी दाखिल करने के लिये तीन हफ्ते का समय दिया है.
न्यायमूर्ति वी. के. शुक्ला और न्यायमूर्ति आदित्यनाथ मित्तल की खण्डपीठ ने स्थानीय वकील अशोक पाण्डेय की जनहित याचिका पर परसों यह आदेश दिया. याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम की नियुक्ति एक ही परिवार में पुश्त-दर-पुश्त के आधार पर होती है, जो भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में अवैध है.
इस पर अदालत ने कहा, ‘‘न्यायालय का यह स्पष्ट मानना है कि दिल्ली की जामा मस्जिद के इतिहास के बारे में और प्रासंगिक सामग्री की आवश्यकता है. खासतौर पर यह देखना होगा कि मस्जिद की देखरेख का जिम्मा सम्भाल रहे लोगों का नाम पूर्व में किसी विवाद से जुडा तो नहीं था.’’ याची की अर्जी पर अदालत ने उसे मस्जिद के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी दाखिल करने के लिये तीन हफ्ते का समय देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 27 नवम्बर नियत की.
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