Rourkela News: राउरकेला के शहरी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सहयोग से शासकीय स्वायत्त महाविद्यालय, राउरकेला में कार्यस्थल पर तनाव प्रबंधन पर एक विशेष चर्चा सत्र का आयोजन किया गया.महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ सस्मिता सामल ने इस आयोजन के लिए नगर निगम के शहरी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम विभाग को धन्यवाद दिया और आशा व्यक्त की कि महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं और सभी वर्ग के कर्मचारियों को इससे लाभ मिलेगा.
आत्महत्या रोकथाम एवं जागरुकता दिवस के उपलक्ष्य में हुआ कार्यक्रम
आत्महत्या रोकथाम एवं आत्महत्या जागरुकता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन एनएसएस समन्वयक प्रोफेसर समीर सौरभ पृष्टि ने किया, जबकि एनएसएस समन्वयक प्रोफेसर रामेश्वरी भोई, वाइआरसी समन्वयक डॉ स्मृति स्निग्धा मिश्रा, बासुदेव माझी और डॉ प्रियरंजन बेहरा उपस्थित थे. इसमें राउरकेला शहर के शहरी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के मनोचिकित्सक विनोद नायक ने आत्महत्या और आत्महत्या से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और इससे उबरने के विभिन्न उपाय बताये. शहरी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के समूह पर्यवेक्षक, सत्यनारायण बेहरा ने कार्यक्रम के आयोजन और प्रासंगिक विषयों को प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों ने भाग लिया.
ब्रजराजनगर महाविद्यालय में मना विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस
झारसुगुड़ा जिले के ब्रजराजनगर महाविद्यालय की युवा रेड क्रॉस शाखा की ओर से विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस उत्साह के साथ मनाया गया. युवा रेड क्रॉस के सलाहकार अमित साहू के स्वागत भाषण से शुरू हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के अध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार साहू ने की और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) के महत्व और इसके जीवन रक्षक लाभों पर विस्तार से चर्चा की. इस अवसर पर मुख्य अतिथि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खलियाकानी के प्रभारी एवं सहायक शल्य चिकित्सक डॉ मीरान दीक्षित थे, जिन्होंने सीपीआर, सर्पदंश प्रबंधन, जलने के उपचार और अन्य महत्वपूर्ण प्राथमिक चिकित्सा प्रक्रियाओं पर विस्तृत व्याख्यान दिया. डॉ दीक्षित ने एक छात्र के साथ सीपीआर कौशल का प्रदर्शन भी किया. महाविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी प्रोफेसर सुप्रकाश चौधरी ने चिकित्सा में तीन पीपीपी शब्द पर चर्चा की. ओड़िया विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्रीकर भोई ने जीवन बचाने और आगे की चोटों को रोकने में प्राथमिक चिकित्सा के महत्व पर बल दिया. इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ ऋतुपर्णा मोहंती ने आज की दुनिया में प्राथमिक देखभाल की प्रासंगिकता और आपातकालीन स्थितियों में इसकी भूमिका के बारे में बताया. कार्यक्रम का समापन लेडी वाइआरसी काउंसलर, संकाय सदस्य चांदनी बिस्वाल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

