Rourkela News: राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) के परियोजना विभाग की ओर से कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) सम्मेलन कक्ष में परियोजना सुरक्षा पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. ओडिशा सरकार के फैक्ट्रीज एवं बॉयलर्स के उपनिदेशक विभु प्रसाद बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित थे. उनके साथ उनकी टीम के सदस्य स्वराज त्रिपाठी और शुभेंदु राउत (दोनों सहायक निदेशक) फैक्ट्रीज एवं बॉयलर्स, ओडिशा सरकार भी मौजूद थे.
सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर साझा किये विचार
ओडिशा सरकार के फैक्ट्रीज एवं बॉयलर्स के अधिकारियों ने परियोजना सुरक्षा, निष्पादन और योजना और परियोजना स्थलों पर समग्र सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक हस्तक्षेप के विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय साझा की. शिविर में आरएसपी की विभिन्न परियोजनाओं के सुरक्षित और निर्बाध निष्पादन को सुनिश्चित करने के लिए परियोजना विभाग की वर्तमान सुरक्षा प्रथाओं और नवीन सुरक्षा पहलों को और बढ़ावा मिलेगा. यह कार्यक्रम कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं), सुदीप पालचौधरी की उपस्थिति में आयोजित किया गया. इस अवसर पर आरएसपी के मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं), आशा कार्था, मुख्य महाप्रबंधक (परियोजनाएं), दिलीप कुमार साहू, अश्विनी कुमार साहू, राहुल अग्रवाल और अवकास बेहरा, परियोजना एवं सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी कार्यक्रम में शामिल हुए. यह कार्यक्रम आरएसपी के सुरक्षा आदर्श वाक्य शून्य क्षति और दुर्घटना मुक्त स्टील के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है.
बरगढ़ : जीवन रक्षक तकनीक सीपीआर का दिया गया प्रशिक्षण
भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, बरगढ़ में एक दिवसीय सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण शिविर शनिवार को आयोजित किया गया. शिविर में संस्थान के स्टाफ और विद्यार्थियों ने भाग लिया और जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की. इस अवसर पर डॉ चंदन दास और सीपीआर मास्टर ट्रेनर इंजीनियर साई रामेश्वर लेंका ने प्रतिभागियों को सीपीआर की बारीकियों से अवगत कराया और व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से प्रशिक्षण दिया. संस्थान के निदेशक ब्रृजेश कुमार अवस्थी ने कहा कि सीपीआर जैसी जीवन रक्षक तकनीकों का ज्ञान होना बेहद जरूरी है. यह प्रशिक्षण समाज को लाभान्वित करेगा. प्रतिभागियों ने आपातकालीन परिस्थितियों में सीपीआर देने की जानकारी हासिल की, जो जीवन बचाने में सहायक साबित हो सकती है.
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