Rourkela News: नवजात शिशुओं को गोद में लिए ठंड में फर्श पर सोने को विवश हैं माताएं

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Rourkela News: नवजात शिशुओं को गोद में लिए ठंड में फर्श पर सोने को विवश हैं माताएं

Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल में बेड की कमी से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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Rourkela News: राज्य की नवीन पटनायक सरकार के कार्यकाल में 660 करोड़ रुपये की लागत से राउरकेला सरकारी अस्पताल (आरजीएच) को विकसित करने का दावा किया गया था. लेकिन यह महज घोषणा ही बनकर रह गया है. वर्ष 2024 में राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार बनी है. हाल ही में मुख्यमंत्री मोहनचरण माझी ने राउरकेला का दौरा किया था तथा मीडियाकर्मियों से बातचीत में आरजीएच में विश्व स्तरीय सुविधा प्रदान करने का दावा किया था. लेकिन राउरकेला सरकारी अस्पताल परिसर स्थित छह मंजिला मदर एंड केयर अस्पताल में सुविधाओं का टोटा है.

सैकड़ों गर्भवती महिलाएं, नवजात शिशु और माताएं हो रहीं परेशान

इस अस्पताल में बेड की कमी के कारण कई माताएं अपने नवजात शिशुओं को गोद में लिए ठंड में फर्श पर सोने को विवश हैं. वहीं ठंड बर्दाश्त न कर पाने के कारण वे परेशानी भी झेल रही हैं. यहां पर करीब 91 बेड हैं. लेकिन यहां पर प्रसव के लिए आनेवाले गर्भवती महिलाओं व नवजात बच्चों को जितनी सुविधा मिलनी चाहिए, उतनी नहीं मिल रही है. खासकर बेड की कमी के कारण एक-दो नहीं, बल्कि 100 से अधिक गर्भवती महिलाएं, नवजात शिशु और माताएं हर दिन परेशान हो रहे हैं. यह गंभीर समस्या महीनों से चली आ रही है. सुंदरगढ़ जिले के गुरुंडिया, नुआगांव, लहुणीपाड़ा, कोइडा, बिसरा ब्लॉक और पड़ोसी झारखंड के जिलों के मरीज अपने परिजनों के साथ यहां इस समस्या से जूझ रहे हैं.

विभागीय अधिकारियों को किया सूचित, नहीं हो रहा समस्या का समाधान

आरजीएच के अधिकारियों का कहना है कि वे बार-बार विभागीय अधिकारियों को सूचित कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस है. वहीं आरजीएच मातृ एवं शिशु अस्पताल में मरीजों की भीड़ कम करने के लिए महज तीन किमी दूर स्थित पानपोष अनुमंडलीय अस्पताल को स्थानांतरित करने की भी सुविधा है, लेकिन वहां बिस्तर होने के बावजूद मरीजों को बिना भर्ती किये लौटा दिया जा रहा है. इसी तरह शहर से सटे कुछ ब्लॉकों के प्राथमिक और सामूहिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और सहायक सुविधाओं की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को आरजीएच मातृ एवं शिशु अस्पताल आने के लिए विवश होना पड़ रहा है.

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Bipin Kumar Yadav

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