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आरएसपी 96 करोड़ रुपये की लागत से बना रहा अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

राउरकेला स्टील प्लांट दैनिक 30 मिलियन लीटर सीवेज वाटर का प्रबंधन करने वाले अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कर रहा है. मई 2025 में परियोजना पूरी करने का लक्ष्य है.

राउरकेला. राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) की ओर से इस्पात नगरी के लिए स्थापित की जा रही अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट सुविधा (एसटीएफ) की परियोजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है. अत्याधुनिक सुविधा 30 मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) सीवेज पानी को संभालने में सक्षम होगी. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) की सलाह के अनुसार की गयी इस प्रमुख पहल का उद्देश्य पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दूर करना और इस्पात नगरी में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है. परियोजना की लागत लगभग 96 करोड़ रुपये है. विशेषत: आरएसपी ने उपरोक्त परियोजना के लिए मेसर्स बीजी पटेल और मेसर्स ओएसिस इपीसी सॉल्यूशन लिमिटेड के एक संघ के साथ जून, 2023 में एक व्यापक अनुबंध पर हस्ताक्षर किये हैं. अनुबंध में अत्याधुनिक सुविधा के लिए स्थापना, कमीशनिंग और पांच साल का संचालन और रखरखाव समझौता शामिल है.

जल प्रसंस्करण के लिए एमबीबीआर तकनीक का करेगा उपयोग

एसटीएफ स्टील टाउनशिप में उत्पन्न होने वाले पूरे सीवेज पानी को संभालेगा. अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जल प्रसंस्करण के लिए नवीनतम मूविंग बेड बायोफिल्म रिएक्टर (एमबीबीआर) तकनीक का उपयोग करेगा. इस परियोजना के मई, 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है. उल्लेखनीय है कि आरएसपी ने सीवेज ट्रीटमेंट प्रणाली को पूरी तरह से बदलने की पहल की है, जो आरएसपी नगरी के सभी निवासियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है. निदेशक प्रभारी अतनु भौमिक और कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) एवं (अतिरिक्त प्रभार, कार्यपालक निदेशक, परियोजना) तरुण मिश्र के नेतृत्व में आरएसपी के परियोजना विभाग द्वारा क्रियान्वित की जा रही है. मेसर्स मेकॉन लिमिटेड इस परियोजना का सलाहकार है, जबकि उपयोगकर्ता विभाग टाउन इंजीनियरिंग और टाउन सर्विसेज हैं.

इस्पात नगरी के निवासियों के लिए एक स्वस्थ वातावरण का निर्माण होगा

यह कार्य मुख्य महाप्रबंधक (परियोजनाएं) एएन मिश्रा, महाप्रबंधक (परियोजनाएं) एसके दास, महाप्रबंधक प्रभारी, नगर इंजीनियरिंग बीके जोजो, महाप्रबंधक, नगर इंजीनियरिंग (जल आपूर्ति) मंगल ओराम, उप महाप्रबंधक (परियोजनाएं) वीके यादव और महाप्रबंधक (नगर सेवाएं) बी मलिक की समर्पित टीम द्वारा किया जा रहा है. यह महत्वाकांक्षी प्रयास सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सेल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. उम्मीद है कि पुनर्निर्मित सीवेज उपचार अवसंरचना से जल संसाधनों की गुणवत्ता में वृद्धि होगी, प्रदूषण में कमी आयेगी और इस्पात नगरी के निवासियों के लिए एक स्वस्थ और बेहतर वातावरण का निर्माण होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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