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Rourkela News: ‘समाज के लिए स्मार्ट और सतत प्रौद्योगिकियां’ पर विश्वभर से शोधार्थी करेंगे चर्चा

Updated at : 21 Aug 2025 11:43 PM (IST)
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Rourkela News: ‘समाज के लिए स्मार्ट और सतत प्रौद्योगिकियां’ पर विश्वभर से शोधार्थी करेंगे चर्चा

Rourkela News: एनआइटी में तीन दिवसीय इंडिया काउंसिल इंटरनेशनल सबसेक्शंस कॉन्फ्रेंस ‘इंडिस्कॉन 2025’ का शुभारंभ हो गया है.

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Rourkela News: एनआइटी राउरकेला में गुरुवार को 6वें आइइइइ (इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स) इंडिया काउंसिल इंटरनेशनल सबसेक्शंस कॉन्फ्रेंस (इंडिस्कॉन 2025) का शुभारंभ हुआ. यह आइइइइ इंडिया काउंसिल का एक प्रमुख वार्षिक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो 21 से 23 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है.

शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को एक मंच पर लाना है उद्देश्य

यह सम्मेलन आइइइइ राउरकेला सबसेक्शन और आइइइइ इंडिया काउंसिल के संयुक्त तत्वावधान में समाज के लिए स्मार्ट और सतत प्रौद्योगिकियां विषय पर आधारित है. कार्यक्रम की शुरुआत प्रो पूनम सिंह (जनरल चेयर, इंडिस्कॉन 2025) के स्वागत भाषण से हुई. उन्होंने बताया कि इंडिस्कॉन आइइइइ इंडिया काउंसिल का वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसे हर वर्ष भारत के किसी अलग आइइइइ सबसेक्शन द्वारा आयोजित किया जाता है. इस वर्ष राउरकेला सबसेक्शन द्वारा एनआइटी राउरकेला में इसका आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विश्वभर के प्रमुख शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को एक मंच पर लाना है. उद्घाटन सत्र में कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही. मुख्य अतिथि के रूप में विश्वरंजन पलई (कार्यकारी निदेशक, राउरकेला स्टील प्लांट, सेल) उपस्थित रहे. विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ आशुतोष दत्ता (प्रोफेसर, जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, अमेरिका एवं एनआइटी राउरकेला के विशिष्ट पूर्व छात्र) शामिल हुए. अतिथि-विशेष के रूप में प्रो के उमामहेश्वर राव (निदेशक, एनआइटी राउरकेला) और प्रो प्रेरणा गौड़ (चेयर, आइइइइ इंडिया काउंसिल) उपस्थित रहे. प्रो सुस्मिता दास (एनआइटी राउरकेला) और प्रो सुदीप मिश्रा (आइआइटी खड़गपुर) सम्मेलन के जनरल चेयर के रूप में मंचासीन रहे.

इंडिस्कॉन 2025 विचारों के आदान-प्रदान का उत्कृष्ट अवसर

मुख्य अतिथि विश्वरंजन पलई ने अपने उद्घाटन संबोधन में प्रतिभागियों से सम्मेलन के सत्रों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया. उन्होंने इंडिस्कॉन 2025 को एक जीवंत मंच बताते हुए कहा कि यह वह स्थान है, जहां प्रतिष्ठित शोधकर्ता अपने क्रांतिकारी कार्य प्रस्तुत करते हैं और विशेषज्ञ अपने बहुमूल्य विचार साझा करते हैं. उन्होंने इसे विचारों के आदान-प्रदान और विज्ञान व प्रौद्योगिकी के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप भविष्य की दिशा तय करने के लिए एक उत्कृष्ट अवसर बताया.

मजबूत पेशेवर नेटवर्क बनाने के महत्व पर दिया जोर

डॉ आशुतोष दत्ता ने प्रौद्योगिकी के विकास और उसे लागू करने के साथ-साथ मजबूत पेशेवर नेटवर्क बनाने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि यदि प्रयास से 80% परिणाम भी प्राप्त हो, तो निरंतरता अंततः सफलता दिलाती है. अपने छात्र जीवन को याद करते हुए उन्होंने एनआइटी राउरकेला को अपने करियर की नींव बताया और अपने संस्थान लौटकर विज्ञान के नए युग पर चर्चा करने वाले मंच का हिस्सा बनने पर खुशी व्यक्त की.

तकनीकी प्रगति को सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप करने की आवश्यकता पर बल दिया

सत्र के दौरान प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने तकनीकी प्रगति को सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप करने की आवश्यकता पर बल दिया और प्रतिभागियों को सतत विकास में योगदान देने वाली अंतःविषय सहयोग संभावनाओं को खोजने के लिए प्रेरित किया. प्रो प्रेरणा गौड़ ने आइइइइ की वैश्विक, क्षेत्रीय और स्थानीय संरचना का परिचय देते हुए अत्याधुनिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने और उद्योग-शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करने की इसकी दृष्टि साझा की. एनआईटी राउरकेला के अन्य विशिष्ट पूर्व छात्र प्रो विद्याधर सुबुद्धि (निदेशक, एनआइटी वारंगल) और प्रो सरत कुमार पात्र (निदेशक, एनआइटी अगरतला) भी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए. उद्घाटन समारोह का समापन प्रो सुस्मिता दास (जनरल चेयर, इंडिस्कॉन 2025) के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ.

21 देशों के प्रतिभागियों से 3570 शोध-पत्र मिले

इंडिस्कॉन 2025 में 21 देशों के प्रतिभागियों से 3,570 शोध-पत्र प्राप्त हुए हैं. यह हाइब्रिड मोड में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 225 प्रतिभागी कैंपस में और करीब 200 प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़ रहे हैं. तीन दिनों के दौरान 425 शोध-पत्र प्रस्तुत किए जायेंगे, साथ ही चार मुख्य भाषण, 18 आमंत्रित व्याख्यान और एक पैनल चर्चा (जिसमें ‘वीमेन इन इंजीनियरिंग’ सत्र शामिल है) भी होंगे. यह सम्मेलन विचार-विनिमय, शोध प्रस्तुति और समाज पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालने वाले नवाचारपूर्ण तकनीकी समाधानों की खोज के लिए एक सक्रिय मंच प्रदान करता है. इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, सतत प्रौद्योगिकियां, वीएलएसआइ डिजाइन, डिजिटल हेल्थकेयर आदि विषयों पर विशेष तकनीकी सत्र शामिल हैं. स्वीकृत एवं प्रस्तुत सभी शोध-पत्र आइइइइ एक्सप्लोर (आइइइइ-एक्सप्लोर) में वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराये जायेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIPIN KUMAR YADAV

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BIPIN KUMAR YADAV is a contributor at Prabhat Khabar.

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