Rourkela News: आइजीएच में 15 वर्षीय किशोर की ऑर्थोस्कोपिक एसीएल पुनर्निर्माण शल्यचिकित्सा हुई

Published by :BIPIN KUMAR YADAV
Published at :01 May 2025 1:33 AM (IST)
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Rourkela News: आइजीएच में 15 वर्षीय किशोर की ऑर्थोस्कोपिक एसीएल पुनर्निर्माण शल्यचिकित्सा हुई

Rourkela News: आइजीएच में 15 वर्षीय किशोर की आर्थोस्कोपिक एसीएल पुनर्निर्माण शल्यचिकित्सा सफलतापूर्वक की गयी. मरीज की हालत अब स्थिर है.

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Rourkela News: राउरकेला इस्पात संयंत्र के इस्पात जनरल अस्पताल में 15 वर्षीय लड़के का सफल ऑर्थोस्कोपिक एसीएल पुनर्निर्माण शल्यचिकित्सा आरएसपी के इस्पात जनरल अस्पताल (आईजीएच) के कुशल डॉक्टरों की एक टीम ने अस्पताल की उन्नत चिकित्सा क्षमताओं को प्रदर्शित करते हुए 15 वर्षीय लड़के पर आर्थोस्कोपिक एसीएल (पूर्वकाल क्रूसिएट लिगामेंट) पुनर्निर्माण शल्यचिकित्सा सफलतापूर्वक की है.

फुटबॉल खेलते समय लगी थी चोट, 22 अप्रैल को अस्पताल में कराया गया था भर्ती

आरएसपी के कनिष्ठ प्रबंधक (टीएंडआरएम) पूर्ण चंद्र कंडी के पुत्र प्रियब्रत कंडी को फुटबॉल की चोट के बाद घुटने की समस्या और दाहिने घुटने में दर्द की शिकायत के साथ 22 अप्रैल, 2025 को आइजीएच में भर्ती कराया गया था. आइजीएच में किए गए एमआरआइ में एक फटे एसीएल का पता चला, एक ऐसी स्थिति जो युवा रोगियों में अगर अनुपचारित छोड़ दी जाय तो घुटने की पुरानी समस्या फिर से उभर सकती है.इस समस्या को हल करने के लिए, डॉक्टरों ने आर्थोस्कोपिक एसीएल पुनर्निर्माण की सलाह दी, एक न्यूनतम प्रक्रिया, जिसमें रोगी के अपने ऊतक का उपयोग करके फटे लिगामेंट का पुनर्निर्माण करना शामिल है. पारंपरिक ओपन सर्जरी के विपरीत, इस उन्नत तकनीक में केवल दो छोटे चीरों की आवश्यकता होती है, जो शल्यचिकित्सा पश्चात दर्द को काफी कम करता है और तेजी से चंगाई को सक्षम बनाता है. रोगी की किशोरावस्था की उम्र के कारण यह विशेष सर्जरी उल्लेखनीय थी. एक ऐसी तकनीक जो अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है और हड्डी में नये अस्थिबंध के बेहतर एकीकरण की सुविधा प्रदान करती है, उसके सहारे सर्जिकल टीम ने पुनर्निर्माण के दौरान मूल अस्थिबंध (लिगामेंट) के अवशेषों को संरक्षित किया.

मरीज ने चिकित्सा टीम का जताया आभार

कंडी ने चिकित्सा टीम के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम आइजीएच की विशेषज्ञ टीम के प्रति उनके उत्कृष्ट सेवा एवं देखभाल के लिए बेहद आभारी हैं. यहा शल्यचिकित्सा की सफलता ने हमें दूर के चिकित्सा केंद्रों की यात्रा करने से बचाया, जिससे समय और लागत दोनों की बचत हुई ,इस प्रक्रिया को डॉ. संजय तिवारी, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी और अस्थि विभाग के प्रमुख के नेतृत्व में एक कुशल टीम द्वारा सटीकता के साथ निष्पादित किया गया, जिसमें अस्थि शल्यचिकित्सक, डॉ एस राउत और डॉ नमन भी शामिल थे. डॉ एम सामंतराय और एनेस्थीसिया टीम द्वारा एनेस्थीसिया सहायता प्रदान की गयी. मरीज वर्तमान में आइजीएच में शल्यचिकित्सा पश्चात पुनर्वास चिकित्सा से गुजर रहा है और तेजी से ठीक होने की राह पर है.

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