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Rourkela News: कैपिटल अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा, आरजीएच की हुई अनदेखी

Rourkela News: भाजपा की डबल इंजन सरकार में राउरकेला सरकारी अस्पताल की उपेक्षा से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है.

Rourkela News: ओडिशा में भाजपा की डबल इंजन सरकार बनी, तो राउरकेला सरकारी अस्पताल (आरजीएच) को विकसित किये जाने की उम्मीद जगी थी. खासकर जिस तरह से भाजपा के नेता व रघुनाथपाली विधायक दुर्गाचरण तांती बार-बार इस अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंच रहे थे, संभावना प्रबल हुई थी कि अब राउरकेला सरकारी अस्पताल के दिन फिरने वाले हैं. खासकर यह उम्मीद जतायी जाने लगी थी कि संभवत: इस अस्पताल काे मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में बदला जा सकता है.

स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा के बाद नाराजगी

सूबे के स्वास्थ्य मंत्री डॉ मुकेश महालिंग ने लोगों की इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है. उन्होंने भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा कर दी है. इससे शहर के बुद्धिजीवी वर्ग में आक्रोश देखा जा रहा है. साथ ही इसे लेकर शहर में यह चर्चा है कि गत बीजद सरकार की भांति अब भाजपा की डबल इंजन सरकार में भी राउरकेला सरकारी अस्पताल सरकारी उपेक्षा का दंश झेलने को विवश है.

सचेतन नागरिक मंच ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कराया ध्यानाकर्षण

इसे लेकर शहर का सर्वांगीण विकास करने को लेकर केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार से लगातार पत्राचार करनेवाले सचेतन नागरिक मंच के संयोजक विमल बिसी ने भी राष्ट्रपति के नाम एक खत लिखकर इस उपेक्षा के प्रति उनका ध्यान आकर्षित कराया है. उन्होंने कहा है कि राउरकेला सरकारी अस्पताल को भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल के स्तर पर उन्नत करने के लिए पूर्ण आधुनिक स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना और गहन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत है. राउरकेला एक स्मार्ट सिटी और मिनी इंडिया होने के नाते घनी आबादी वाला शहर है और पश्चिमी ओडिशा के महत्वपूर्ण औद्योगिक और खनन केंद्रों के रूप में कार्य करता है, जो राज्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है. भारी उद्योगों, बिजली संयंत्रों और खनन गतिविधियों की उपस्थिति ने स्वास्थ्य जोखिम, व्यावसायिक खतरों और उन्नत चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता को बढ़ा दिया है. लेकिन दुर्भाग्य से राउरकेला में मौजूदा अस्पताल अवसंरचना, गुणवत्तापूर्ण उपचार और आपातकालीन देखभाल की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है. उन्होंने इस अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने के लिए बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण, उपकरणों की खरीद और विशेषज्ञ सेवाओं के लिए केंद्र सरकार की सहायता, उन्नत गहन चिकित्सा इकाइयों, आघात देखभाल केंद्रों और विशेष विभागों (हृदय रोग, तंत्रिका विज्ञान, कैंसर विज्ञान, नेफ्रोलॉजी, आदि) की स्थापना, पर्याप्त योग्य डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती, रखरखाव और विस्तार के लिए निरंतर धन सुनिश्चित करने के लिए जिला खनिज निधि (डीएमएफ) और क्षेत्र के उद्योगों से कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) योगदान का एकीकरण, दूरदराज के शहरों में मरीजों के रेफरल को कम करने के लिए टेलीमेडिसिन और सुपर-स्पेशलिटी परामर्श सुविधाओं की शुरुआत को लेकर उनका ध्यान आकर्षित कराया है.

कैपिटल अस्पताल के मुकाबले आरजीएच में मरीजों की संख्या 60 फीसदी अधिक

विमल बिसी ने साथ ही राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ मुकेश महालिंग को भी निशाने पर लिया है. उनका कहना है कि हाल ही में ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री ने कैपिटल अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड करने की घोषणा की. लेकिन मंत्री को यह भी सोचना चाहिए कि राउरकेला भी एक स्मार्ट सिटी है. भुवनेश्वर स्मार्ट सिटी के कैपिटल अस्पताल के मुकाबले राउरकेला सरकारी अस्पताल (आरजीएच) में मरीजों की संख्या 60 फीसदी अधिक है. दोनों अस्पताल 1960 के दशक से संचालित हो रहे हैं, तो फिर राउरकेला की उपेक्षा क्यों की जा रही है. प्रधानमंत्री द्वारा अप्रैल, 2015 में किये गये वादे के अनुसार राउरकेला में एक पूर्ण विकसित सरकारी मेडिकल कॉलेज होना चाहिए था. लेकिन 10 साल बीतने के बाद भी प्रधानमंत्री की घाेषणा केवल घाेषणा में ही सीमित हाेकर रह गयी है. बिसी ने आगे कहा है कि इस अस्पताल के उन्नयन से न केवल अनगिनत लोगों की जान बचेगी, बल्कि भुवनेश्वर और कटक के रेफरल अस्पतालों पर बोझ भी कम होगा. यह पश्चिमी ओडिशा में बेहतर स्वास्थ्य सेवा की लंबे समय से चली आ रही जनता की मांग को भी पूरा करेगा, जहां औद्योगिक और खनन गतिविधियों ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को बढ़ा दिया है.

भाजपा प्रत्याशी की हार का खामियाजा तो नहीं भुगत रही है शहर की जनता

राउरकेला सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाना हो, राउरकेला महानगर निगम का चुनाव कराना हो, राउरकेला में जेवियर इंस्टीट्यूट की स्थापना का सवाल हो, वेदव्यास में हैंगिंग ब्रिज बनाना हो अथवा राउरकेला को नया रेल डिवीजन बनाना हो, विकास के इन सभी मुद्दों पर राज्य में सत्तासीन भाजपा की डबल इंजन सरकार ने कोई विशेष पहल नहीं की है, जिससे कि यह लगे कि सरकार राउरकेला के विकास को लेकर गंभीर है. इसे लेकर अब शहर में यह चर्चा भी हो रही है कि कहीं शहर की जनता भाजपा प्रत्याशी की हार का खामियाजा तो नहीं भुगत रही है.

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