Bhubaneswar News: ओडिशा के उपमुख्यमंत्री तथा कृषि एवं कृषक सशक्तीकरण मंत्री कनक वर्धन सिंहदेव की अध्यक्षता में सोमवार को लोकसेवा भवन में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी. इसमें केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम, 1992 के तहत संबलपुर में विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की गयी.
वैश्विक प्रतिस्पर्धा योग्य मानव संसाधन तैयार करना है उद्देश्य
इस प्रस्तावित विश्वविद्यालय का उद्देश्य कृषि एवं संबद्ध विज्ञानों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा योग्य मानव संसाधन तैयार करना है, साथ ही यह लाभकारी कृषि प्रणाली के विकास और उत्पादन वृद्धि में भी सहायक होगा. उपमुख्यमंत्री श्री सिंहदेव ने कहा कि यह विश्वविद्यालय ओडिशा के लिए एक परिवर्तनकारी पहल साबित होगा. यह न केवल कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देगा, बल्कि किसानों को सशक्त बनायेगा और सतत कृषि पद्धतियों में नवाचार को प्रोत्साहित करेगा. उन्होंने कहा कि कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को लाभकारी उद्यमों में बदलकर यह पहल लोगों के लिए खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी. बैठक में कृषि एवं कृषक सशक्तीकरण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ अरविंद कुमार पाढ़ी, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव संजीव कुमार मिश्रा, मत्स्य एवं पशुपालन विकास विभाग के प्रमुख सचिव सुरेश कुमार वशिष्ठ तथा ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ प्रभात कुमार राउल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे और सभी ने इस प्रस्ताव पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किये.चांदोल, कोरुआ-कलाबुदा व मार्शाघाई को शहरी निकाय घोषित करने की मांग
केंद्रापाड़ा जिले के चांदोल, कोरुआ-कलाबुदा व मार्शाघाई को शहरी निकाय घोषित किया जाये. इन्हें नोटिफाइड एरिया काउंसिल (एनएसी) की मान्यता प्रदान की जाये. भाजपा के प्रवक्ता तथा प्रदेश सोशल मीडिया प्रमुख उमाकांत पटनायक ने राज्य के शहरी विकास मंत्री डॉ कृष्ण चंद्र महापात्र से मिल कर इस संबंधी मांग की है. उन्होंने इस बाबत ज्ञापन भी सौंपा. उन्होंने कहा कि इन तीनों क्षेत्रों में 22,000 से अधिक की आबादी निवास करती है, जोकि शहरी निकाय घोषित किये जाने के लिए पर्याप्त है. इन इलाकों में शैक्षणिक संस्थान जैसे महाविद्यालय भी मौजूद हैं. लेकिन इन इलाकों को शहरी निकाय घोषित नहीं किये जाने के कारण मूल भूत सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पा रही हैं. उन्होंने बताया कि मार्शाघाई क्षेत्र एक प्रखंड मुख्यालय है, फिर भी नागरिक सुविधाओं की भारी कमी है. जल निकासी, ठोस कचरा प्रबंधन, सड़क पर प्रकाश व्यवस्था और परिवहन की सुचारु व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं अभी भी अधूरी हैं. पटनायक ने कहा कि इन समस्याओं के स्थायी समाधान और स्थानीय जनता के व्यापक हित में शहरी निकाय व नोटिफाइड एरिया काउंसिल (एनएसी) घोषित किया जाना चाहिए, जिससे क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आ सकेगा. मंत्री श्री महापात्र ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

