Coronavirus Lockdown Effect: दिल्ली से 200 किमी पैदल चलने के बाद दिल्ली-आगरा हाइवे पर हो गयी रणवीर की मौत, जाना था मध्यप्रदेश के मुरैना

Updated at : 29 Mar 2020 1:19 PM (IST)
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Coronavirus Lockdown Effect: दिल्ली से 200 किमी पैदल चलने के बाद दिल्ली-आगरा हाइवे पर हो गयी रणवीर की मौत, जाना था मध्यप्रदेश के मुरैना

New Delhi: Migrants along with their family members walk to their villages amid the nationwide lockdown, in the wake of coronavirus pandemic, at Delhi Uttar Pradesh Border, Saturday, March 28, 2020. (PTI Photo/Arun Sharma) (PTI28-03-2020_000227A)

ranveer singh of madhya pradesh collapsed on delhi-agra highway as he was walking towards morena मुरैना/आगरा : रणवीर सिंह के जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा था. आराम से कमा और खा रहा था. अचानक लॉकडाउन की घोषणा हो गयी. रेस्टोरेंट में काम करने वाला रणवीर सिंह (38) बेरोजगार हो गया. उसने गांव जाने की सोची. मध्यप्रदेश के मुरैना स्थित अंबा के बड़ का पुरा गांव. दिल्ली से उसके गांव की दूरी करीब 300 किलोमीटर थी. लॉकडाउन की वजह से गाड़ियां बंद हैं. सो उसने पैदल चलने का निश्चय किया. 200 किलोमीटर का सफर तय कर लिया. अभी वह गांव से 100 किलोमीटर दूर ही था कि दिल्ली-आगरा हाइ-वे पर उसकी छाती में दर्द हुआ और वहीं उसकी मौत हो गयी.

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मुरैना/आगरा : रणवीर सिंह के जीवन में सब कुछ ठीक चल रहा था. आराम से कमा और खा रहा था. अचानक लॉकडाउन की घोषणा हो गयी. रेस्टोरेंट में काम करने वाला रणवीर सिंह (38) बेरोजगार हो गया. उसने गांव जाने की सोची. मध्यप्रदेश के मुरैना स्थित अंबा के बड़ का पुरा गांव. दिल्ली से उसके गांव की दूरी करीब 300 किलोमीटर थी. लॉकडाउन की वजह से गाड़ियां बंद हैं. सो उसने पैदल चलने का निश्चय किया. 200 किलोमीटर का सफर तय कर लिया. अभी वह गांव से 100 किलोमीटर दूर ही था कि दिल्ली-आगरा हाइ-वे पर उसकी छाती में दर्द हुआ और वहीं उसकी मौत हो गयी.

शनिवार की सुबह जब रणवीर ने दम तोड़ा, उसके साथ दो और लोग थे. उन्होंने पुलिस को बताया कि थोड़ी देर पहले रणवीर ने सीने में दर्द की शिकायत की थी. थोड़ी ही दूर जाने के बाद वह निढाल होकर जमीन पर गिर पड़ा. दिल्ली छोड़कर अपने गांव की ओर जाने वाले हजारों प्रवासी मजदूरों में मौत का यह पहला मामला है. कोरोना वायरस की वजह से देश में घोषित 21 दिन के लॉकडाउन ने प्रवासी श्रमिकों को अपने गांवों की ओर लौटने के लिए मजबूर कर दिया है.

रणवीर के साथियों ने बताया कि लॉकडाउन की घोषणा के बाद पुलिस ने तमाम दुकानों और रेस्टोरेंट को बंद करवा दिया. हालांकि, सरकार ने कहा था कि खाने-पीने की दुकानें बंद नहीं होंगी. बस एहतियात यह बरतनी है कि रेस्टोरेंट में बैठकर लोग नहीं खायेंगे. रेस्तरां वालों को होम डिलीवरी की छूट दी गयी थी. बावजूद इसके, पुलिस वालों ने किसी रेस्तरां को खोलने की अनुमति नहीं दी.

आगरा जिला के पुलिस प्रमुख बबलू कुमार ने बताया कि दक्षिणी दिल्ली के तुगलकाबाद में एक रेस्टोरेंट में रणवीर काम करता था. रेस्टोरेंट बंद हो गया, तो हजारों प्रवासी श्रमिकों की तरह रणवीर भी अपने गांव जाने की जद्दोजहद कर रहा था. सरकारी और निजी परिवहन सेवाएं पूरी तरह से बंद हैं. ट्रेनें भी नहीं चल रही हैं. इसलिए उसके पास अपने गांव तक की 300 किलोमीटर की दूरी पैदल नापने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह गया था.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आगरा में जिस वक्त रणवीर ने सीने में दर्द की शिकायत की, तीनों वहीं रुक गये. एक स्थानीय दुकानदार उनकी मदद के लिए आगे आया. उसने रणवीर को थोड़ी देर के लिए लिटाने को कहा. तीनों चाय और बिस्किट खाने के लिए दिये. सूचना मिली, तो पुलिस भी वहां पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. रणवीर की सांसें थम चुकीं थीं. उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया, ताकि यह पता चल सके कि उसकी मौत किस वजह से हुई.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऑटॉप्सी रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल का दौरा पड़ने की वजह से उसकी मृत्यु हुई है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि बहुत ज्यादा पैदल चलने की वजह से संभवत: उसे दिल का दौरा पड़ा. पोस्टमार्टम के बाद शव को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है. पुलिस ने मृतक के मोबाइल फोन से उसके परिजनों को उसकी मृत्यु की सूचना दी. इसके बाद मालूम हुआ कि वह मुरैना के अंबा क्षेत्र के बड़ का पुरा का रहने वाला था, जो इस जगह से 100 किलोमीटर दूर है.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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