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मजदूर दिवस विशेष: लोहरदगा में निबंधित मनरेगा मजदूरों को भी नहीं मिल पा रहा काम, ना ही बेरोजगारी भत्ता, पलायन को हैं मजबूर

Updated at : 30 Apr 2024 9:58 PM (IST)
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काम करते मनरेगा मजदूर

काम करते मनरेगा मजदूर

झारखंड के लोहरदगा जिले में निबंधित मनरेगा मजदूरों को भी काम नहीं मिल पा रहा है और ना ही बेरोजगारी भत्ता. इस कारण लोग दूसरे राज्यों में पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं.

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कुड़ू (लोहरदगा), अमित कुमार राज: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागू होने के बावजूद कुड़ू में मनरेगा से निबंधित मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है. अधिनियम के तहत रोजगार नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है बावजूद इसके मजदूरों को ना तो रोजगार मिल पा रहा है ना ही बेरोजगारी भत्ता. कुड़ू प्रखंड की 14 पंचायतों में मनरेगा से कुल निबंधित मजदूरों की संख्या 39 हजार एक सौ 25 जबकि कुल परिवारों की संख्या बीस हजार दो सौ 66 है. इसमें पिछले वित्तिय वर्ष 2023-2024 में महज 311 परिवारों को एक साल में सौ दिन का रोजगार मिल पाया है. रोजगार के अभाव में मजदूर दूसरे प्रदेशों में पलायन कर रहे हैं.

निबंधित मजदूरों की संख्या 39125
बताया जाता है कि प्रखंड के 14 पंचायतों में कुल निबंधित मजदूरों की संख्या 39125 है जबकि निबंधित परिवारों की संख्या बीस हजार दो सौ 66 है. इसमें बड़की चांपी पंचायत में तीन हजार 90, चंदलासो पंचायत में दो हजार 9 सौ 21, चीरी पंचायत में एक हजार छह सौ 57, जीमा पंचायत में दो हजार पांच सौ 70, जिंगी पंचायत में दो हजार तीन सौ 45, ककरगढ़ पंचायत में तीन हजार पांच सौ 11, कोलसिमरी पंचायत में तीन हजार छह सौ 69, कुड़ू पंचायत में दो हजार दो सौ दस, लावागांई पंचायत में दो हजार चार सौ 41, पंडरा पंचायत में दो हजार तीन सौ दस, सलगी पंचायत में तीन हजार 60 , सुंदरू पंचायत में तीन हजार आठ सौ 45, टाटी पंचायत में दो हजार 9 सौ 28, उडुमुड़ू पंचायत में दो हजार पांच सौ 68 मजदूर मनरेगा में निबंधित मजदूर हैं.

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इन्हें मिल पाया सौ दिन का रोजगार
मनरेगा अधिनियम के तहत निबंधित मजदूर परिवारों को साल में एक सौ दिन का रोजगार देने का प्रावधान बनाया गया है. इसमें महज प्रखंड के 14 पंचायतों में तीन सौ 11 निबंधित मजदूर परिवारों को साल एक सौ दिन का रोजगार मिल पाया है. मजदूरों को रोजगार देने में सलगी पंचायत सबसे आगे है. सबसे फिसड्डी ककरगढ़ पंचायत हैं. मजदूर परिवारों को रोजगार देने में बड़की चांपी पंचायत में 37 परिवार, चंदलासो पंचायत में 50 परिवारों, चीरी पंचायत में 7 परिवारों, जीमा पंचायत में 27 परिवारों, जिंगी पंचायत में 30 परिवारों, ककरगढ़ पंचायत में दो परिवारों, कोलसिमरी पंचायत में 34 परिवारों, कुड़ू पंचायत में 6 परिवारों, लावागाई पंचायत में 4 परिवारों, पंडरा पंचायत में 6 परिवारों, सलगी पंचायत में 64 परिवारों, सुंदरू पंचायत में 6 परिवारों, टाटी पंचायत में 27 परिवारों तथा उडुमुड़ू पंचायत में 11 परिवारों को एक साल में सौ दिन का रोजगार मिल पाया है.

रोजगार नहीं देने पर मिलेगा बेरोजगारी भत्ता
प्रखंड में मनरेगा में काम देने का औसत देखा जाए तो काफी कम है . कुल मिलाकर प्रखंड में मनरेगा का हाल बेहाल है. प्रखंड में मनरेगा से तीन सौ विकास योजनाओं का संचालन किया जा रहा है. इस संबंध में बीडीओ प्रवेश कुमार साव ने बताया मनरेगा में मजदूर काम मांगेंगे तो काम ससमय दिया जायेगा. रोजगार नहीं देने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा. मनरेगा में प्रत्येक पंचायत में विकास योजनाओं के संचालन तथा अधिक से अधिक मानव दिवस सृजन करने का निर्देश दिया गया है.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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