सारंडा के जंगलों में मिसिर बेसरा के दस्ते और सुरक्षा बलों में मुठभेड़, कोबरा बटालियन के चार जवान घायल

सारंडा के जंगलों में नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़. एआई जेनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर.
Naxal Encounter: सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है. सर्च ऑपरेशन के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और रुक-रुक कर फायरिंग हो रही है. कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और पुलिस बल मौके पर तैनात हैं. कई नक्सलियों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
सारंडा से प्रणव और संदीप गुप्ता की रिपोर्ट
Naxal Encounter: झारखंड के सारंडा जंगल में बुधवार को एक बार फिर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई. यह मुठभेड़ कुख्यात इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ हो रही है. नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में कोबरा बटालियन के चार जवान घायल हो गया, एयरलिफ्ट कर रांची ले जाया गया. छोटा नगर थाना क्षेत्र के बालिबा से एयरलिफ्ट कर जवानों को रांची ले जाया गया. इलाके में सर्च जारी है. नक्सलियों को क्या हानि पहुंची है. यह अभी पता नहीं चल पाया है.
जंगल में तलाशी अभियान
जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बल इलाके में लंबे समय से चल रहे सर्च ऑपरेशन के तहत जंगल में तलाशी अभियान चला रहे थे. इसी दौरान नक्सली अचानक सामने आ गए और उन्होंने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी. अचानक हुई इस गोलीबारी के बाद सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की.
कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई
मौके पर सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस बल के जवान मौजूद हैं. ये सभी यूनिट्स नक्सल विरोधी ऑपरेशन में विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षाबलों को खुफिया सूचना मिली थी कि कुख्यात नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा अपने दस्ते के साथ सारंडा के जंगलों में सक्रिय है. इसी सूचना के आधार पर सर्च ऑपरेशन तेज किया गया था.
कैंप शिफ्ट कर रहे नक्सलियों से टकराव
बताया जा रहा है कि मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब नक्सली जंगल के अंदर अपने ठिकाने को बदल रहे थे. इसी दौरान सुरक्षाबलों की टीम वहां पहुंच गई और दोनों का आमना-सामना हो गया. पुलिस को देखते ही नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए उन्हें घेरने की कोशिश की.
कई नक्सलियों के मारे जाने की आशंका, पुष्टि नहीं
सूत्रों के अनुसार, इस मुठभेड़ में कई नक्सलियों के मारे जाने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, अभी तक किसी भी नक्सली का शव बरामद नहीं हुआ है और न ही सर्च ऑपरेशन में जुटे सुरक्षा बलों के अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि ही की गई है. जंगल का घना इलाका और लगातार फायरिंग के कारण सुरक्षाबलों को सटीक स्थिति का आकलन करने में समय लग रहा है.
इलाके में हाई अलर्ट, ऑपरेशन जारी
फिलहाल पूरे इलाके को घेर लिया गया है और अतिरिक्त बलों को भी तैनात कर दिया गया है. सुरक्षाबल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं, ताकि नक्सलियों को पूरी तरह से खत्म किया जा सके. अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक इलाके को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता.
बीच-बीच में फायरिंग कर रहे नक्सली: एसपी
जिले के एसपी अमित रेणू ने बताया कि कोबरा जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है. नक्सलियों की ओर से बीच-बीच में फायरिंग हो रही है, जिसका सुरक्षा बल सतर्कता के साथ जवाब दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही विस्तृत जानकारी सामने आ पाएगी. फिलहाल पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और सुरक्षा बलों द्वारा सघन सर्च अभियान जारी है.
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नक्सल गतिविधियों का गढ़ है सारंडा
सारंडा का घना जंगल लंबे समय से नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाई से नक्सल गतिविधियों में कमी आई है, लेकिन बीच-बीच में इस तरह की मुठभेड़ की घटनाएं सामने आती रहती हैं.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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