शक्तिपीठ है हतनाबेड़ा का मां संबलेश्वरी मंदिर
Updated at : 14 Apr 2017 5:53 AM (IST)
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मंदिर का पट खुलते ही उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ पूजा के लिए लगी लंबी कतार मनोकामाना पूर्ण होने पर भक्तों ने दी मां संबलेश्वरी को बलि 1790 से हो रही है मां संबलेशवरी की पूजा, ओड़िशा के भाट ने स्थापित की थी प्रतिमा नोवामुंडी : गुरुवार को हतनाबेड़ा स्थित मां संबलेश्वरी की मंदिर में पूजा-अर्चना […]
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मंदिर का पट खुलते ही उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पूजा के लिए लगी लंबी कतार
मनोकामाना पूर्ण होने पर भक्तों ने दी मां संबलेश्वरी को बलि
1790 से हो रही है मां संबलेशवरी की पूजा, ओड़िशा के भाट ने स्थापित की थी प्रतिमा
नोवामुंडी : गुरुवार को हतनाबेड़ा स्थित मां संबलेश्वरी की मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. सुबह मंदिर का पट खुलते ही महिलाएं, बच्चे, बूढ़े व जवान पंक्तिबद्ध होकर मंदिर के गर्भ गृह में पूजा-अर्चना की. मौके पर मां संबलेश्वरी से श्रद्धालुओं ने अमन-चैन, सुख-शांति व समृद्धि की कामना की. भजन-कीर्तन से माहौल भक्तिमय हो गया था.
मन्नतें पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने दी बलि: ऐसी मान्यता है कि मां संबलेश्वरी मंदिर में श्रद्धालु सच्चे मन से जो मन्नतें मांगते हैं, वह पूरी हो जाती है. इसी कारण से हर साल यहां भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है. जिनकी मन्नतें पूरी हुई हैं, उन लोगों ने खस्सी, बत्तख व मुर्गा की बलि देते हैं. ओड़िशा स्थित संबलपुर की मां संबलेश्वरी मंदिर की 18 पीठ में हतनाबेड़ा मंदिर को भी शक्ति पीठ के रूप में माना जाता है. मगधा गौड़ जाति समेत हर संप्रदाय के लोग पूजा-अर्चना करने आते हैं. साल में दो बार मां के दरबार हतनाबेड़ा मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती है.
1790 से हो रही है पूजा: हतनाबेड़ा के बीरबल गोप (90)
का कहना है कि वर्ष 1790 से हतनाबेड़ा में मां संबलेश्वरी की पूजा हो रही है. बीरबल गोप बताते हैं कि 1700 में संबलपुर से भाट ने मां संबलेशवरी मंदिर से एक पत्थर लाकर हतनाबेड़ा में प्राण-प्रतिष्ठा की थी. इसके बाद हतनाबेड़ा मंदिर को शक्ति पीठ की संज्ञा दे दी गयी. भाट संबलपुर से हरेक साल आकर बोदा का पूजा कर चला जाता था. यह सिलसिला सन 1900 तक चली. इसके बाद पूजा के लिए भाट ने आना बंद कर दिया. मां की पूजा बंद होने के बाद पूरे क्षेत्र में अकाल व महामारी फैल गयी. मां की प्राण-प्रतिष्ठा पर किसी ने हल चलाकर पत्थर को उलट दिया था. उस समय मंदिर का निर्माण नहीं हो सका था. खुले आसमान के नीचे ही पूजा होती थी. काफी मशक्कत के बाद भाट को ओड़िशा से बुलाकर देवी की पूजा-अर्चना करायी गयी. इसके बाद स्थिति सुधरी.
1985 में हुआ पूजा कमेटी का गठन: 1985 में मगधा गौड़ समाज को बुलाकर कमेटी गठित कर नियमित रूप से मां संबलेश्वरी की पूजा-अर्चना की जाने लगी. वर्तमान में पूजा कमेटी में गणेश गोप अध्यक्ष,रामचंद्र गोप सचिव,गजेंद्र गोप उपाध्यक्ष व गोमा को सह सचिव मनोनीत किया गया. अब मंदिर भवन कीर्तन मंडप के साथ श्रद्धालुओं के लिए विश्रामालय भवन का निर्माण हो चुका है .इस मंदिर में आशीर्वाद लेने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा व विधायक गीता कोड़ा भी आती हैं.
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