आदिवासी हित में मुखर हो बोलते थे मुंडा
Updated at : 21 Mar 2017 2:45 AM (IST)
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कांग्रेस भवन चाईबासा . आदिवासी महासभा के संस्थापक की पुण्यतिथि मनी चाईबासा : झारखंड आंदोलन के प्रणेता व आदिवासी महासभा के संस्थापक स्वर्गीय जयपाल सिंह मुंडा की पुण्यतिथि पर सोमवार को कांग्रेस भवन चाईबासा में श्रद्धांजलि सभा व उनकी जीवनी पर परिचर्चा हुई. कांग्रेस जिलाध्यक्ष सन्नी सिंकु ने कहा कि मारंग गोमके स्वर्गीय जयपाल सिंह […]
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कांग्रेस भवन चाईबासा . आदिवासी महासभा के संस्थापक की पुण्यतिथि मनी
चाईबासा : झारखंड आंदोलन के प्रणेता व आदिवासी महासभा के संस्थापक स्वर्गीय जयपाल सिंह मुंडा की पुण्यतिथि पर सोमवार को कांग्रेस भवन चाईबासा में श्रद्धांजलि सभा व उनकी जीवनी पर परिचर्चा हुई. कांग्रेस जिलाध्यक्ष सन्नी सिंकु ने कहा कि मारंग गोमके स्वर्गीय जयपाल सिंह मुंडा संविधान सभा के सदस्य थे. उन्होंने 1946 को संविधान सभा में आदिवासियों के हित की रक्षा में मुखर होकर बोला था. उन्होंने कहा था कि आदिवासी ही देश के पहले नागरिक हैं.
जिला सचिव त्रिशानु राय ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा हमारे झारखंड के लिए सभी दृष्टिकोण से प्रेरणास्रोत हैं. चाहे हॉकी टीम के भारतीय भारतीय कप्तान के रूप में हो या ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीताने से राजनीतिक जीवन तक का सफर हो. नगर अध्यक्ष सुनित शर्मा ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा इंगलेंड में शिक्षा ग्रहण करने के बाद राजनीतिक जीवन में प्रवेश किया. सबसे पहले उन्होंने झारखंड विषयक को 1953 में सदन के पटल पर रखा. परिचर्चा में शिक्षा विभाग चैयरमैन सनातन बिरुवा, प्रखंड अध्यक्ष सुरेश सावैयां , संजय बिरुवा, जिला कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सामड, कार्यालय सचिव शैली शैलेन्द्र सिंकु, वरिय नगर उपाध्यक्ष संतोष खलको, बुल्लू दास, गौतम हुई, गंगा राम सोय, बाबू चांद शामिल थे.
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