बंगाल चुनाव 2026: आंखों में आंसू और दिल में बारूद, ऐसा है पानीहाटी की भाजपा उम्मीदवार रत्ना देबनाथ का प्रचार
घर-घर जाकर प्रचार करतीं रत्ना देबनाथ. फोटो : प्रभात खबर
Aankhon Me Aansu Dil Me Barood: बेटी को न्याय दिलाने के लिए चुनाव के मैदान में उतरी रत्ना देबनाथ वोट मांगने जहां भी जा रहीं हैं, महिलाएं भावुक हो जातीं हैं. कई महिलाएं उन्हें गले लगाकर रो पड़तीं हैं. रत्ना के प्रचार अभियान के इस दृश्य पर भाजपा ने क्या कहा है, यहां पढ़ें.
Aankhon Me Aansu Dil Me Barood: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की पीड़िता ‘अभया’ की मां रत्ना देबनाथ ने अपना प्रचार अभियान तेज कर दिया है. रत्ना जहां भी प्रचार करने जाती हैं, उन्हें देखकर महिलाओं की आंखें नम हो जातीं हैं. बुजुर्ग महिलाएं उन्हें गले लगाकर रो पड़तीं हैं. भाजपा का दावा है कि बंगाल की महिलाओं की आंखों में आंसू और दिल में बारूद है. इस बार चुनाव में ‘आंसुओं के सैलाब’ और ‘गुस्से के बारूद’ का असर दिखेगा.
रीढ़ की हड्डी बिकाऊ नहीं, अभया की मां का प्रचार अभियान
रत्ना देबनाथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर पानीहाटी विधानसभा सीट से बंगाल विधानसभा का चुनाव लड़ रहीं हैं. भाजपा उम्मीदवार काली पाढ़ वाली सफेद साड़ी पहनकर प्रचार कर रहीं हैं. साड़ी की काली पट्टी पर सफेद अक्षरों में बांग्ला में लिखा है- मेरुदंड बिक्री नेई. यानी रीढ़ की हड्डी बिकाऊ नहीं है.
नारी सुरक्षा के मुद्दे पर घर-घर जाकर वोट मांग रहीं रत्ना देबनाथ
रत्ना देबनाथ महिलाओं पर हो रहे अत्याचार और असुरक्षा के मुद्दे को लोगों के बीच रख रहीं हैं. घर-घर जाकर प्रचार कर रहीं हैं और बंगाल की चीफ मिनिस्टर ममता बनर्जी के खिलाफ मतदान की अपील कर रहीं हैं. वह समूचे राज्य से तृणमूल कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील कर रहीं हैं. उनका वादा है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी, तो महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जायेगी.
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मतदाताओं के पैर छूकर आशीर्वाद ले रहीं हैं भाजपा प्रत्याशी
उत्तर 24 परगना के पानीहाटी विधानसभा क्षेत्र की भाजपा उम्मीदवार ने रविवार को अपने प्रचार अभियान की शुरुआत की. वह घर-घर जाकर वोट मांग रहीं हैं. बुजुर्ग मतदाताओं के पैर छूकर आशीर्वाद लेतीं हैं. छोटे बच्चे और बच्चियां उनके पैर छूकर आशीर्वाद ले रहे हैं.
आरजी कर कांड में पुलिस की भूमिका पर उठे थे सवाल
आरजी कर कांड के बाद पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे थे. उस समय जूनियर डॉक्टरों ने सड़कों पर ‘रीढ़ की हड्डी’ को फूलों की माला पहनाकर विरोध प्रदर्शन किया था. इसका स्पष्ट संदेश था कि पुलिस रीढ़विहीन हो चुकी है. अभया की मां ने कहा है कि वह मानवता और न्याय के लिए चुनाव लड़ रही हैं. तृणमूल को सत्ता से बेदखल करने के लिए लोगों से वोट देने की अपील कर रहीं हैं.
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