रामतीर्थ व महादेवशाल राजकीय महोत्सव घोषित

Updated at : 17 Jan 2017 5:35 AM (IST)
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रामतीर्थ व महादेवशाल राजकीय महोत्सव घोषित

चाईबासा . डीसी चैंबर में हुई बैठक में दी गयी हरी झंडी अब राज्य सरकार की ओर से दोनों स्थलों पर लगेगा मेला छह में से दो पर्यटक स्थलों को पर्यटन समिति ने दी हरी झंडी चाईबासा : जगन्नाथपुर प्रखंड का रामतीर्थ धाम और गोइलकेरा प्रखंड के बाबा महादेवशाल धाम को राजकीय महोत्सव घोषित किया […]

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चाईबासा . डीसी चैंबर में हुई बैठक में दी गयी हरी झंडी

अब राज्य सरकार की ओर से दोनों स्थलों पर लगेगा मेला
छह में से दो पर्यटक स्थलों को पर्यटन समिति ने दी हरी झंडी
चाईबासा : जगन्नाथपुर प्रखंड का रामतीर्थ धाम और गोइलकेरा प्रखंड के बाबा महादेवशाल धाम को राजकीय महोत्सव घोषित किया गया है. दोनों धाम पर अब राज्य सरकार की ओर से मेला का आयोजन होगा. सोमवार को डीसी चैंबर में हुई बैठक में दोनों तीर्थ स्थल को राजकीय महोत्सव घोषित करने को हरी झंडी दी गयी. राज्य सरकार अब दोनों धाम को विधिवत रूप से राजकीय पर्यटन स्थल घोषित किया जायेगा. बैठक में उपायुक्त डॉ शांतनु कुमार अग्रहरि, मझगांव विधायक निरल पुरती, भाजपा जिलाध्यक्ष सुरू नंदी और डीआरडीए डायरेक्टर अमित कुमार आदि उपस्थित थे.
जिले के प्रमुख महोत्सव में दो का हुआ चयन. मझगांव के बेनीसागर स्थित पुरातत्विक स्थल, टोंटो के सिरिंगसिया घाटी में लगने वाला मेला, खुंटपानी के लोहरदा में लगने वाला मेला, चाईबासा-हाटगम्हरिया मार्ग पर हाक्कुयम धाम, चक्रधरपुर का केरा मेला, लुपुंगगुटू का करनी मंदिर, गौशाला मेला समेत रामतीर्थ व महादेवशाल धाम को जिला प्रशासन ने प्रसिद्ध तीर्थ व पर्यटक स्थल के रूप में चयन किया था. इनमें महादेवशाल धाम व रामतीर्थ धाम का चयन किया गया.
रामतीर्थ : नदी के एक चट्टान में प्रभु राम के
पद चिह्न
जगन्नाथपुर की सियालजोड़ा पंचायत में झारखंड-ओड़िशा सीमा पर वैतरणी नदी किनारे रामतीर्थ धाम स्थित है. पौराणिक कथा के अनुसार वनवास क्रम में प्रभु राम इसी स्थान पर वैतरणी नदी के किनारे रूके थे. प्रभु राम का पद चिह्न नदी के एक चट्टान पर है. इस तीर्थ स्थल पर झारखंड के 60 हजार और ओड़िशा से 40 हजार श्रद्धालु प्रति वर्ष मकर मेला में जुटते हैं.
महादेवशाल : शिवलिंग तोड़ने वाला करने लगा था खून की उल्टी
राजकीय महोत्सव के रूप में चयनित महादेवशाल की पौराणिक कथा का जिक्र प्रशासन की रिपोर्ट में किया गया है. अंग्रेजी हुकूमत के समय रेल लाइन बनाने के क्रम में काफी प्रयास के बाद एक पत्थर को नहीं हटाया जा सका. मजूदरों ने बताया कि यह आम पत्थर नहीं, बल्कि शिवलिंग है. मजदूरों ने शिवलिंग तोड़ने से इनकार कर दिया. तब एक अंग्रेज अधिकारी छेनी-हथौड़ी लेकर पत्थर तोड़ने लगा. इस क्रम में उसकी तबीयत खराब हो गयी. वह खून की उल्टी करने लगा. इसके बाद यहां से रास्ता मोड़कर रेल लाइन का निर्माण कराया गया. उक्त स्थान पर मंदिर का निर्माण हुआ. गोइलकेरा प्रखंड के बड़ैला गांव में स्थित महादेवशाल धाम में प्रतिवर्ष पांच लाख पर्यटक जुटते हैं.
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