मामा-भांजा दोनों थे अच्छे फुटबॉलर
Updated at : 14 Sep 2016 5:47 AM (IST)
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चाईबासा के कमारहातु में एक ही दिन मामा-भांजे का हुआ निधन चाईबासा : बचपन से ही मामा और भांजे में पक्की दोस्ती थी. दोनों अकसर साथ जीने और मरने की बात करते थे, लेकिन किसे पता था कि यह घटना हो जायेगी. ऐसा ही चाईबासा के कमारहातु में हुआ. दरअसल नारायण देवगम और संग्राम सुंडी […]
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चाईबासा के कमारहातु में एक ही दिन मामा-भांजे का हुआ निधन
चाईबासा : बचपन से ही मामा और भांजे में पक्की दोस्ती थी. दोनों अकसर साथ जीने और मरने की बात करते थे, लेकिन किसे पता था कि यह घटना हो जायेगी. ऐसा ही चाईबासा के कमारहातु में हुआ. दरअसल नारायण देवगम और संग्राम सुंडी दोनों मामा-भांजा थे. दोनों में गहरी दोस्ती थी. सामाजिक कार्यक्रमों व अन्य मौके पर दोनों साथ दिखते थे. इस दौरान मामा-भांजे की जुबान से अकसर सुनने को मिलता था कि वे साथ जीयेंगे और साथ मरेंगे. दोनों अपने जमाने में साथ में फुटबॉल खेलते थे और अच्छे खिलाड़ी थे. दोनों का एक साथ सोमवार को निधन हो गया.
टोंटो प्रखंड के पेरतोल गांव निवासी संग्राम (54 वर्ष) वर्तमान में सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव थे. मंगलवार को दोनों का अंतिम संस्कार किया गया. स्व नारायण के अंतिम दर्शन के लिए टीएसी सदस्य जेबी तुबिड, मुखिया निरेश देवगम, विपिन लागुरी, जगदीश पाट पिंगुवा, पूर्व वार्ड पार्षद मिथलेश सावैयां आदि पहुंचे थे.
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