यहां 1500 लोग एक साथ करते है इबादत

चाईबासा : चाईबासा शहर में दूसरी मसजिद के रूप में जामा मसजिद की स्थापना की गई थी. सदर हाजी इमदाद हुसैन बताते है कि 1834 के आसपास बनी यह मसजिद तब मिट्टी की हुआ करती थी. बाद में बढ़ती आबादी को देखते हुए 1972 के आसपास इस मिट्टी के मसजिद को शहीद कर नयी मसजिद […]
चाईबासा : चाईबासा शहर में दूसरी मसजिद के रूप में जामा मसजिद की स्थापना की गई थी. सदर हाजी इमदाद हुसैन बताते है कि 1834 के आसपास बनी यह मसजिद तब मिट्टी की हुआ करती थी. बाद में बढ़ती आबादी को देखते हुए 1972 के आसपास इस मिट्टी के मसजिद को शहीद कर नयी मसजिद की स्थापना की गई.
वर्तमान दो तल्ला इस मसजिद में 1500 से अधिक लोग नमाज अदा करते है. जबकि त्योहार के मौके पर यह संख्या 2000 को पार कर जाती है. वर्ष 2004 के आसपास जामा मसजिद की स्वतंत्र कमेटी बनी. पांच वक्त के नमाजी ही इस कमेटी के पदाधिकारी व सदस्य बनते है.
कमेटी वर्तमान मसजिद को अत्याधुनिक व वातानुकूलित करना चाहती है. इसके अलावा नमाजियों की बढ़ती तादाद को देखते हुए मसजिद के दूसरे तल्ले का छत ढलाई करने के साथ–साथ तीसरे तल्ले के निर्माण पर विचार किया जा रहा है. वर्तमान कमेटी के सचिव हाजी अबदूल रशीद तथा कैशियर मास्टर नसीब साहब है.
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