8 का नामांकन, शिक्षकों पर खर्च हुए 1.37 करोड़

Updated at : 19 May 2018 4:43 AM (IST)
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8 का नामांकन, शिक्षकों पर खर्च हुए 1.37 करोड़

केयू: एलबीएसएम ने 5 साल में आठ मैथिली छात्रों का लिया दाखिला एबीएम में शिक्षक हो गये हैं रिटायर, चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा की हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आयी है. एक ओर केयू में जहां -गणित, भौतिकी, रसायन, जनजातीय जैसे विषयों में शिक्षकों का टोटा है. वहीं मैथिली विषय में […]

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केयू: एलबीएसएम ने 5 साल में आठ मैथिली छात्रों का लिया दाखिला

एबीएम में शिक्षक हो गये हैं रिटायर,
चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा की हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आयी है. एक ओर केयू में जहां -गणित, भौतिकी, रसायन, जनजातीय जैसे विषयों में शिक्षकों का टोटा है. वहीं मैथिली विषय में पांच साल में मात्र आठ छात्रों का नामांकन हुआ. इन बच्चों की पढ़ाई के लिए नियुक्त दो शिक्षकों के वेतन पर 1.37 करोड़ रुपये खर्च हुए. चाईबासा के बालीगुमा निवासी दीपक रंजीत की ओर से सूचना अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी में इसका खुलासा हुआ है. कोल्हान विवि में दो कॉलेजों (एलबीएसएम व एबीएम ) में ही मैथिली की पढ़ाई होती है. दस्तावेज के अनुसार एलबीएसएम कॉलेज में मैथिली विषय के दो शिक्षकों के वेतन मद पर हर साल औसतन 30 लाख रुपये से खर्च हो रहा है. जबकि इस कॉलेज में मैथिली में हर साल दो-चार बच्चे की नामांकन
दो शिक्षकों के…
ले रहे हैं. वहीं एबीएम कॉलेज में पांच साल में मैथिली विषय में एक भी नामांकन नहीं हुआ. यहां मैथिली विषय के शिक्षक रिटायर कर गये हैं. इस विषय के यहां शिक्षक भी नहीं हैं.
एलबीएसएम में आठ का हुआ नामांकन : जानकारी के मुताबिक एलबीएसएम कॉलेज में वर्ष 2014 में तीन, 2015 में एक, 2016 में एक, 2017 में दो व 2018 में एक विद्यार्थी का नामांकन मैथिली विषय में हुआ है. जबकि एबीएम कॉलेज में एक भी नामांकन नहीं हुआ.
आरके चौधरी व एके झा हैं मैथिली के शिक्षक : एलबीएसएम कॉलेज में डॉ आरके चौधरी व डॉ एके झा मैथिली विषय के शिक्षक हैं. डॉ झा वर्तमान में कोल्हान विश्वविद्यालय में कुलसचिव तथा डॉ चौधरी एनसीसी की जिम्मेवारी निभा रहे हैं.
20 से कम विद्यार्थी वाले विषयों को बंद करने का निर्देश : उच्च तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग ने पांच शैक्षणिक सत्र के दौरान 20 से कम छात्र संख्या वाले विषयों को बंद करने का आदेश दिया है. छात्र-शिक्षक अनुपात को सही करने के लिए केयू सहित राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया के तहत यह आदेश जारी हुआ है. इसमें अलग-अलग जगहों पर ऐसे विषयों में स्वीकृत पद की कटौती का भी प्रावधान किया गया है. केयू में यह पूरी प्रक्रिया संचालित की गयी. मगर, फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गयी है.
केयू में जनजाति भाषा के मात्र एक शिक्षक : कोल्हान विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा विभाग है. विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित विभिन्न अंगीभूत कॉलेजों में हो, संताली व कुड़माली में पर्याप्त संख्या में छात्र अध्ययनरत हैं. मगर छात्रों की तुलना में शिक्षक नहीं है. विवि के क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा विभाग में मात्र एक स्थायी शिक्षक हैं.
दो शिक्षकों के वेतन पर खर्च हुई राशि का ब्योरा
सत्र डॉ एके झा आरके चौधरी
2017-18 17,26,578 13,27,269
2016-17 27,94,192 13,63,186
2015-16 08,76,778 10,52,636
2014-15 14,50,620 11,15,292
2013-14 10,04,415 10,29,505
कुल योग -1,37,404,71
‘हो’ विषय को अलग विभाग करने की कुलपति से मांग : विवि छात्र संघ अध्यक्ष सनातन पिंगुवा ने ‘हो’ भाषा विषय को अलग विभाग का दर्जा देने की मांग को लेकर शुक्रवार को कुलपति डॉ शुक्ला मोहंती को एक मांग पत्र सौंपा. मांग पत्र में सनातन पिंगुवा ने कुलपति को बताया कि केयू के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में वर्तमान में कुल तीन भाषाओं (हो, संताली व कुरमाली) की पढ़ाई संयुक्त विषय के रूप में करायी जाती है. इसमें हो विषय में स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों की संख्या सर्वाधिक है. जिस कारण हो, विषय की कक्षाओं का संचालन दो पालियों में हो रहा है. इससे विद्यार्थियों को काफी कठिनाई हो रही है. इस कारण छात्रों की परेशानी को देखते हुए यथाशीध्र ‘हो’ भाषा को अलग विभाग का दर्जा दिया जाये.
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