सुहागिनों ने कुमकुम-तुलसी की पूजा कर मांगी पति की लंबी आयु

Updated at : 10 May 2018 5:11 AM (IST)
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सुहागिनों ने कुमकुम-तुलसी की पूजा कर मांगी पति की लंबी आयु

चक्रधरपुर : बालाजी मंदिर, चक्रधरपुर में आयोजित 35वें पंचाह्निक वार्षिक ब्रह्मोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को सामूहिक कुमकुम एवं तुलसी पूजा अनुष्ठान का आयोजन किया गया. पूजा में बड़ी संख्या में शहर समेत दूर-दराज के लोग शामिल हुए. मंदिर में कुमकुम पूजा अनुष्ठान की शुरुआत सुबह साढ़े दस बजे से शुरू हुई. इस दौरान पूजा […]

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चक्रधरपुर : बालाजी मंदिर, चक्रधरपुर में आयोजित 35वें पंचाह्निक वार्षिक ब्रह्मोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को सामूहिक कुमकुम एवं तुलसी पूजा अनुष्ठान का आयोजन किया गया. पूजा में बड़ी संख्या में शहर समेत दूर-दराज के लोग शामिल हुए. मंदिर में कुमकुम पूजा अनुष्ठान की शुरुआत सुबह साढ़े दस बजे से शुरू हुई. इस दौरान पूजा में शामिल महिलाअों ने पति की दीर्घायु की कामना की.
कुमकुम एवं तुलसी पूजा का समापन दोपहर करीब डेढ़ बजे हुआ. पूजा में तिरुपति बालाजी मंदिर के तर्ज पर सभी विधि-विधानों का निर्वाह किया गया. मौके पर मौजूद सुहागिनों ने कहा कि वार्षिक ब्रह्मोत्सव में कुमकुम व तुलसी पूजा-अर्चना एक विशिष्ट पूजा अनुष्ठान है. यूं तो हर दिन घरों में माता लक्ष्मी व विष्णु की पूजा होती है, लेकिन ब्रह्मोत्सव में तिरुपति के पंडितों के मंत्रोच्चारण विधि से पूजन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. उन्होंने बताया इस पूजा में सुहागिन पति की दीर्घायु जीवन और परिवार की सुख-शांति की कामना मां लक्ष्मी व भगवान विष्णु से करती हैं. सुहागिनों ने कहा कि कई लोग तिरुपति नहीं जा पाते हैं, वे चक्रधरपुर में तिरुपति बालाजी का दर्शन-पूजन सकते हैं. भगवान बालाजी श्रद्धालुओं की हर मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
मंदिर में वसंतोत्सव आज
10 मई को मंदिर में वसंतोत्सव मनाया जायेगा. इस दौरान उत्सव मूर्ति को झूले में स्थापित कर झुलाया जायेगा. 5001 दीप जलाये जायेंगे. तिरुपति की इस परंपरा को निभाने के लिए सैकड़ों लोगों का मंदिर आगमन होगा. संध्या 6 बजे नित्य हवन, संध्या 7 बजे सहस्त्रनाम अर्चना व आस्थन कुमकुम अर्चना व रात्रि 9 बजे प्रसाद वितरण होगा.
उत्सव मूर्ति के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
दोपहर को मंदिर में एक हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाभोग ग्रहण किया. प्रसाद तिरुपति के रसोइया ने तैयार किया था. देर शाम मंदिर से उत्सव मूर्ति का बाजे-गाजे के साथ नगरभ्रमण कराया गया. इस दौरान पंडितों द्वारा लगातार मंत्रोच्चारण किया जा रहा था. वहीं जहां-जहां से उत्सव मूर्ति गुजरी, दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लगती रही.
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