अब विधानसभा बचाने की चुनौती

तीन विधानसभा में बेहतर प्रदर्शन कर भी हार गयीं गीता कोड़ा किरीबुरू/चाईबासा : सिंहभूम संसदीय सीट पर तीन विधानसभाओं मझगांव में 52,275, चाईबासा में 43157 और जगन्नाथपुर में 43,136 वोटों के साथ बेहतर प्रदर्शन के बावजूद गीता कोड़ा जीत की दहलीज पर नहीं पहुंच सकी. गीता कोड़ा के हार के कारणों की पड़ताल भले ही […]
तीन विधानसभा में बेहतर प्रदर्शन कर भी हार गयीं गीता कोड़ा
किरीबुरू/चाईबासा : सिंहभूम संसदीय सीट पर तीन विधानसभाओं मझगांव में 52,275, चाईबासा में 43157 और जगन्नाथपुर में 43,136 वोटों के साथ बेहतर प्रदर्शन के बावजूद गीता कोड़ा जीत की दहलीज पर नहीं पहुंच सकी. गीता कोड़ा के हार के कारणों की पड़ताल भले ही अभी पार्टी के स्तर पर शुरू नहीं हो सकी है लेकिन कार्यकर्ता इस हार के मायने और भविष्य के नफा-नुकसान के आकलन में जुट गये हैं.
सीट पर जय भारत समानता पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी भी गीता कोड़ा की हार के मुख्य कारणों में एक बनी. अगर हार के कारणों में इन तथ्यों को जोड़ा जाये तो स्पष्ट है कि पहले से गीता व मधु कोड़ा का दुर्गा ढाहने की तैयारी में जुटी भाजपा यह मौका नहीं चूकना चाहेगी और तब जगन्नाथपुर विधानसभा को बचा पाना भी गीता कोड़ा के लिए मुश्किल होगी.
दरअसल मधु कोड़ा ने भाजपा से अलग होकर ही जभासपा का गठन किया था. तब उनके साथ अधिकांश कार्यकर्ता भी भाजपा से आये थे जिनकी मानसिकता में कमल कहीं न कहीं खिल रहा था. मोदी के राष्ट्रीय पटल पर उदय होने के बाद विक्षुब्ध ऐसे कार्यकर्ताओं ने यू टर्न लेकर क्रास वोटिंग की. जिसके कारण मधु कोड़ा का रिकार्ड लक्ष्मण गिलुवा ने तोड़ दिया. सैकड़ों की संख्या में ऐसे विक्षुब्ध अब भाजपा के पुराने घर में लौटने की तैयारी में है. अगर ऐसा हुआ तो विधानसभा चुनाव में गीता कोड़ा को जगन्नाथपुर विधानसभा सीट बचाना भी मुश्किल हो जायेगा.
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