22 साल बाद भी गितिकेंदु के लोगों को मुआवजा नहीं
Updated at : 05 Jan 2018 6:18 AM (IST)
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सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण हुआ था जगन्नाथपुर : जगन्नाथपुर अनुमंडल में सेलदौरी से गितिकेंदु होते हुए बुरुबोरता तक सड़क निर्माण के लिये भूमि अधिग्रहण हुआ था. जबकि जमीन देने वाले कई गांवों के लोगों को अबतक मुआवजा नहीं मिला है. गितिकेंदु, बड़ापासेया, उदाजौव, बुरोबरात के ग्रामीणों को नहीं मिला है. हालांकि सेलदौरी के […]
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सड़क निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण हुआ था
जगन्नाथपुर : जगन्नाथपुर अनुमंडल में सेलदौरी से गितिकेंदु होते हुए बुरुबोरता तक सड़क निर्माण के लिये भूमि अधिग्रहण हुआ था. जबकि जमीन देने वाले कई गांवों के लोगों को अबतक मुआवजा नहीं मिला है. गितिकेंदु, बड़ापासेया, उदाजौव, बुरोबरात के ग्रामीणों को नहीं मिला है. हालांकि सेलदौरी के ग्रामीणों को मुआवजा मिल चुका है. इसे लेकर आदिवासी हो समाज युवा महासभा के पूर्व अध्यक्ष सह समाजसेवी मनोज लागुरी ने कहा कि सड़क के लिये वर्ष 1995 में भूमि अधिग्रहण किया गया.
वर्ष 1999 में मुआवजा का नोटिस भू-अर्जन विभाग से आया. गितिकेंदु के लिये मुआवजा की राशि पांच लाख रुपये थी. अधिक राशि होने के कारण भू -अर्जन विभाग चाईबासा ने इसके लिये रांची अपर उपायुक्त को पत्राचार किया. इसके बाद भी अब तक मुआवजा का भुगतान गितिकेंदु के जमीनदाताओं को नहीं हो पाया है.
मुख्यमंत्री जनसंवाद में 6 दिसंबर 2016 को शिकायत की गयी. 29 दिसंबर को सीधी बात में मुख्यमंत्री ने जिले के उपायुक्त को मामले की जांच कर मुआवजा भुगतान करने निर्देश दिया था. अब तक किसी प्रकार की कार्यवाही भू-अर्जन विभाग से नहीं की गयी. मालूम हो कि दो जनवरी को भू-अर्जन विभाग से पदाधिकारी गितुकेंदु गांव पहुंचे थे. जमीन रैयतों से खतियान और अधिग्रहित जमीन की पड़ताल की गयी है.
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