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खुंटकटी व्यवस्था एक पारंपरिक भूमि स्वामित्व प्रणाली है:विधायक

Updated at : 28 Dec 2025 7:23 PM (IST)
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खुंटकटी व्यवस्था एक पारंपरिक भूमि स्वामित्व प्रणाली है:विधायक

ठेठइटांगर प्रखंड के बोम्बलकेरा पंचायत में खुंटकटी रैयतों द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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कोलेबिरा: ठेठइटांगर प्रखंड के बोम्बलकेरा पंचायत में खुंटकटी रैयतों द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी उपस्थित थे. विधायक कोनगाड़ी ने खुंटकटी रैयतों को संबोधित करते हुए कहा कि खुंटकटी व्यवस्था एक पारंपरिक भूमि स्वामित्व प्रणाली है, जो खासकर मुंडा समुदाय में है, जिन्होंने जो जंगल कृषि योग्य भूमि बनाया. जिस पर मुंडा समुदाय का स्वामित्व है.इस भूमि पर किसी एक व्यक्ति का स्वामित्व नहीं होता है बल्कि सामुहिक स्वामित्व होता है. उन्होंने कहा कि खुंटकटी भूमि पर वंशागत अधिकार होता है.इस भूमि का मालगुजारी सरकार द्वारा नहीं ली जाती है. किंतु खुंटकटीदार खुद रसीद काटता है और सरकार को बख्शीश के तौर पर देता है. उन्होंने कहा कि जब भारत देश अंग्रेजों के हाथों गुलाम था उस समय अंग्रेजों से लड़ कर ये कानून खुंटकटी अधिकार प्राप्त किया गया, जो आज तक बरकरार है.कार्यक्रम में काफी संख्या में मुंडा समाज के लोग उपस्थित थे. डाइर मेला का आयोजन तीन को बानो. प्रखंड के तिनसोंगड़ा में डाइर मेला का आयोजन तीन जनवरी को किया गया है. इस अवसर पर नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा.कार्यक्रम शनिवार सुबह 10 बजे से अपराह्न पांच बजे तक होगा. कार्यक्रम में गायक रूपेश बड़ाइक,कृष्णा बड़ाइक,जीवन लकड़ा और डांसर मनीषा कुमारी भाग लेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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