करोड़ों की लागत से बना मॉडल डिग्री कॉलेज बेकार, नहीं है पहुंच पथ
Updated at : 04 Jan 2026 8:14 PM (IST)
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प्रखंड के बरवाडीह ग्राम के समीप राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित मॉडल डिग्री कॉलेज आज भी विद्यार्थियों का इंतजार कर रहा है
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दो साल बाद भी नामांकन शुरू नहीं, गरीब छात्रों का भविष्य अधर में
रथिंद्र गुप्ता कोलेबिरा. प्रखंड के बरवाडीह ग्राम के समीप राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित मॉडल डिग्री कॉलेज आज भी विद्यार्थियों का इंतजार कर रहा है. कॉलेज भवन का निर्माण पूरा हुए दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है और कुछ माह पूर्व इसका ऑनलाइन उदघाटन भी हो चुका है. लेकिन अब तक कॉलेज तक पहुंचने के लिए रास्ते की व्यवस्था नहीं हो सकी है. पहुंच पथ के अभाव में कॉलेज में नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पायी है. जिससे प्रखंड के गरीब और ग्रामीण छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा से वंचित हैं. जिस स्थान पर कॉलेज का प्रवेश द्वार बनाया गया है. उसके आगे रैयतों की निजी भूमि है. जमीन मालिकों द्वारा घेराबंदी किये जाने के कारण रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कॉलेज निर्माण से पहले ही प्रखंड प्रशासन को पहुंच पथ की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी. लेकिन इस गंभीर पहलू को नजरअंदाज कर दिया गया. कोलेबिरा प्रखंड अति पिछड़ा क्षेत्र है. जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि और मजदूरी पर निर्भर है. ऐसे में बच्चों को बाहर भेजकर पढ़ाना अधिकांश परिवारों के लिए संभव नहीं है. ग्रामीणों को उम्मीद थी कि कॉलेज बनने से उनके बच्चों को गांव में ही उच्च शिक्षा मिलेगी. लेकिन पहुंच पथ नहीं होने से यह सपना अधूरा रह गया.बातचीत चल रही है
इधर प्रखंड प्रशासन का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए बातचीत चल रही है और जल्द ही रास्ते की व्यवस्था कर दी जायेगी.
जितेंद्र तिवारी (जमीन मालिक):
मैं कॉलेज के लिए रास्ता देने को तैयार हूं. लेकिन बदले में सरकार मुझे वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराये. यदि जमीन दी जाती है तो उस पर मेरे अधिकार स्पष्ट हों या फिर मेरे एक बच्चे को कॉलेज में समायोजित किया जाये. सरकार को व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए.गौरी प्रसाद सिंह (रैयत):
जिस भूमि पर कॉलेज बना है उस पर हमारे पूर्वजों का सौ साल से खेती का अधिकार रहा है. निर्माण के समय हमसे कोई बातचीत नहीं हुई. रास्ता देने में हमें आपत्ति नहीं, लेकिन प्रशासन यह स्पष्ट करे कि हमें इसका क्या लाभ मिलेगा और हमारे अधिकार सुरक्षित रहेंगे.मनोहर प्रसाद (पूर्व सांसद प्रतिनिधि):
दो साल बीत जाने के बाद भी पहुंच पथ का समाधान नहीं होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही है. बिना रास्ते की व्यवस्था किए कॉलेज बनाना गलत योजना का परिणाम है. इससे सीधे तौर पर गरीब छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.सुनील खड़िया (सांसद प्रतिनिधि):
कॉलेज का उद्घाटन हुए डेढ़ साल हो चुके हैं. लेकिन पढ़ाई शुरू नहीं हुई. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. जिला प्रशासन को तुरंत जमीन मालिकों से वार्ता कर रास्ता बनवाना चाहिए ताकि आने वाले सत्र में नामांकन शुरू हो सके.अशोक इदवार (भाजपा मंडल अध्यक्ष):
कोलेबिरा में पहले से एक डिग्री कॉलेज है. लेकिन सभी संकाय उपलब्ध नहीं हैं. नया सरकारी कॉलेज तैयार होने के बाद भी बंद पड़ा है. प्रशासन को जल्द से जल्द पहुंच पथ की समस्या हल कर पढ़ाई शुरू करनी चाहिए.फिरोज अली (झामुमो केंद्रीय सदस्य):
यह कॉलेज पूरे प्रखंड के छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है. पहुंच पथ के कारण नामांकन नहीं होना बेहद चिंताजनक है. जिला प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द समाधान निकालना चाहिए ताकि ग्रामीण छात्र-छात्राओं को लाभ मिल सके.स्थानीय ग्रामीण संजय कुमार, बाबूलाल प्रसाद :
हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे गांव में ही पढ़ें. कॉलेज बनकर तैयार है. लेकिन रास्ता नहीं होने से सब बेकार हो रहा है. प्रशासन तुरंत कदम उठाए और कॉलेज चालू कराए. ताकि गरीब परिवारों के बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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