सिमडेगा में चापाकल और जलमिनार खराब, नदी का पानी पीने के लिए विवश हैं लोग, लेकिन प्रशासन बेपरवाह

सरकार एक ओर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक जलापूर्ति योजना के क्रियान्वयन का दावा करती है. हर घर तक नल के माध्यम से जल को पहुंचाने का दावा भी करती है. वहीं दूसरी ओर गांव के ग्रामीण आज भी नदी का गंदा पानी पीने को विवश हैं.
Jharkhand News, Simdega News सिमडेगा : जिला के पाकरटांड़ प्रखंड के ठेठाईटांगर, करजीडांड़ गांव के ग्रामीण नदी का पानी पीकर प्यास बुझाने को विवश हैं. गांव में सात चापाकल लगा हुआ है. जो दो वर्षों से खराब पड़ा है. गांव में एक जलमीनार भी है. किंतु वह भी खराब है. चापाकल खराब होने के कारण ग्रामीण नदी का दूषित पानी पी रहे हैं. इसके कारण बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है.
सरकार एक ओर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक जलापूर्ति योजना के क्रियान्वयन का दावा करती है. हर घर तक नल के माध्यम से जल को पहुंचाने का दावा भी करती है. वहीं दूसरी ओर गांव के ग्रामीण आज भी नदी का गंदा पानी पीने को विवश हैं.
जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर बसी पाकरडांड पंचायत के करजीडांड ठेठाईटांगर गांव. गांव में लगभग 100 घर है. गांव की आबादी लगभग 500 है. पानी की तलाश में गांव की 80 वर्षीय वृद्ध महिला सलोमी बखला को भी पानी लाने नदी जाना पड़ता है.
गांव की महिला निर्मला बखला ने बताया कि चापाकल तो खराब है ही एक पुराना कुआं है, वो भी गर्मी में सूख जाता है. बरसात के समय कुआं में वर्षा का पानी जमा होता है. लेकिन वह पानी पीने योग्य नहीं है. महिलाओं ने बताया कि रोजाना सुबह-शाम नदी जाकर ग्रामीण पानी लाते हैं. नदी का पानी भी लाल रहता है.
लेकिन वे लोग उसे छान कर पानी का उपयोग करते हैं. आज पेयजल की समस्या को लेकर गांव में ग्रामीणों ने शीतल लकड़ा की अध्यक्षता में बैठक भी की. बैठक में सचिव पहियास कुजूर ने बताया कि अगर कल तक गांव में हैंडपंप नहीं लगाया गया, तो प्रखंड कार्यालय का घेराव करेंगे.
बैठक में मुख्य रूप से बिलिचदान बाड़ा, अनुप लकड़ा, अनुग्रह लकड़ा, विवेक लकड़ा, सलमोन बाड़ा, विकास किड़ो, नियारन किड़ो, सलोमी, जोलजेन, आस्रिता, मुलिनता, ओहमा एक्का, निर्मल बाड़ा के अलावा अन्य लोग भी उपस्थित थे.
Posted By : Sameer Oraon
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