आदिवासी बहुल जिले में 456 टोला में बिजली की सुविधा मयस्सर नहीं

Updated at : 09 Aug 2016 8:15 AM (IST)
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आदिवासी बहुल जिले में 456 टोला में बिजली की सुविधा मयस्सर नहीं

361 टोला में चापानल तथा 173 टोला में सड़क नहीं रविकांत साहू सिमडेगा : सिमडेगा आदिवासी बहुल जिला है. जिले में लगभग 72 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है, जो मुख्य रूप से गांवों में निवास करती है. किंतु आज भी जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में विकास की किरणें नहीं पहुंच सकी है. जिले में […]

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361 टोला में चापानल तथा 173 टोला में सड़क नहीं
रविकांत साहू
सिमडेगा : सिमडेगा आदिवासी बहुल जिला है. जिले में लगभग 72 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है, जो मुख्य रूप से गांवों में निवास करती है. किंतु आज भी जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में विकास की किरणें नहीं पहुंच सकी है. जिले में दो विधान सभा सीट है. दोनों आदिवासी के लिए आरक्षित है.
आजादी के बाद से ही जिले के दोनों विधान सभा सीट पर आदिवासी जनप्रतिनिधि चुने गये हैं. इसके बावजूद आदिवासी बहुल इलाकों में विकास की किरणें नहीं पहुंची. जिले के 456 टोलों में आज तक बिजली की रोशनी लोगों ने नहीं देखा है. लोग आज भी ढिबरी युग में जीने को विवश है. शाम होते ही गांवों में अंधेरा छा जाता है. जिले के 361 टोलों में आज भी ग्रामीण पेयजल के लिए कुओं व चुओं पर आश्रित है.
361 टोलों में आज तक चापानल नहीं लगा है. जिले के 173 टोलों में आवागमन में लिए रोड नहीं है. ग्रामीण पगडंडी के रास्ते, ऊंचे, नीचे पहाड़ को लांघ कर अपने गांव पहुंचते हैं. अगर कोई बीमार हो जाता है, तो उसे खटिया पर मीलों पैदल चल कर सड़क तक लाया जाता है. एसपी राजीव रंजन सिंह ने जिले की उपेक्षित गांवों का सर्वे कराया है. सर्वे में पाया गया कि 456 टोलों में बिजली नहीं, 361 टोलों में चापानल नहीं तथा 173 टोलों में आज तक सड़क नहीं बनी. इसमें कई टोला अति उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में है. श्री सिंह ने कहा कि उनके द्वारा कराये गये सर्वे की रिपोर्ट को उपायुक्त के पास भेज दी गयी है.
विश्व आदिवासी दिवस नहीं मनाने का निर्णय : सिमडेगा़ सरकार द्वारा सीएनटी व एसपीटी एक्ट में छेड़छाड़ करने एवं स्थानीय नीति के विरोध में आदिवासी अधिकार सुरक्षा मंच ने विश्व आदिवासी दिवस नहीं मनाने का निर्णय लिया है. नौ अगस्त को आयोजित विश्व आदिवासी दिवस के दिन सदस्य अनुमंडल कार्यालय के निकट मुंह पर काली पट्टी बांध कर मौन प्रदर्शन करेंगे. जिला अध्यक्ष मतियस कुल्लू ने कहा कि सीएनटी व एसपीटी एक्ट में संशोधन आदिवासियों का अधिकार छीनने जैसा है.
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