सिमडेगा : लैंपस कार्यालय की जांच शुरू, गड़बड़ियां उजागर

Updated at : 14 Jul 2017 9:24 AM (IST)
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सिमडेगा : लैंपस कार्यालय की जांच शुरू, गड़बड़ियां उजागर

उपभोक्ताओं के करोड़ों रुपये अधर में लटके सिमडेगा : सिमडेगा लैंपस कार्यालय में चल रहे मिनी बैंक में हुई वित्तीय अनियमितता के विरोध में पिछले आठ माह से उपभोक्ताओं द्वारा किये जा रहे प्रदर्शन एवं अनियमितता की जांच की मांग के बाद प्रशासन की नींद खुली है. उपायुक्त के निर्देश पर लैंपस कार्यालय में चल […]

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उपभोक्ताओं के करोड़ों रुपये अधर में लटके
सिमडेगा : सिमडेगा लैंपस कार्यालय में चल रहे मिनी बैंक में हुई वित्तीय अनियमितता के विरोध में पिछले आठ माह से उपभोक्ताओं द्वारा किये जा रहे प्रदर्शन एवं अनियमितता की जांच की मांग के बाद प्रशासन की नींद खुली है. उपायुक्त के निर्देश पर लैंपस कार्यालय में चल रहे मिनी बैंक की जांच शुरू कर दी गयी है.
इसके लिये टीम का गठन किया गया है, जिसमें एसडीओ जगबंधु महथा, कार्यपालक दंडाधिकारी कुमार मयंक भूषण, जिला सहकारिता पदाधिकारी अभिनव मिश्रा एवं एलडीएम रवींद्र कुमार शामिल किये गये हैं.
गुरुवार को जांच टीम लैंपस कार्यालय पहुंची. टीम के सदस्यों ने सभी पंजियों की जांच की. लैंपस के अध्यक्ष मेरी टोपनो सहित अन्य लैंपस कर्मियों से पूछताछ की. पूछताछ एवं जांच के क्रम में भारी वित्तीय गड़बड़ी पायी गयी. जांच टीम के सदस्य कुमार मयंक भूषण ने बताया कि लैंपस कार्यालय के माध्यम से मिनी बैंक चलाया जाता था, जिसमें 22 से 25 हजार खाताधारी हैं. खाताधारियों द्वारा करोड़ों रुपये जमा किये गये हैं, किंतु खाताधारियों का भुगतान नहीं हो पा रहा था. खाताधारियों की शिकायत पर ही जांच शुरू की गयी है. उन्होंने बताया कि मामला काफी गंभीर है. इसकी जांच के लिए ऑडिटरों को लगाया जायेगा. ऑडिट के बाद ही लेनदेन का खुलासा हो पायेगा.
आठ माह से भटक रहे खाताधारी
लैंपस कार्यालय के खाताधारी राशि निकासी के लिए पिछले आठ माह से लैंपस का चक्कर काट रहे हैं, किंतु उनके पैसे की निकासी नहीं हो पा रही है. उपभोक्ताओं के कितने पैसे जमा हैं, इसका आंकड़ा तो समझ नहीं आ रहा है. किंतु बताया जा रहा है कि आंकड़ा करोड़ों में हैं. पिछले आठ माह से खाताधारियों द्वारा कई बार पैसे की मांग को लेकर हो-हंगामा किया गया. कई बार तालाबंदी भी की गयी, किंतु आश्वासन के अलावा खाताधारियों को कुछ भी हाथ नहीं आया. बताया जाता है कि लैंपस में अधिकतर खाताधारी गरीब तबके के लोग हैं. मेहनत मशक्कत कर लोग पैसे जमा करते थे.
पैसे नहीं मिलने पर प्रबंधन पर होगा केश
इधर, खाताधारियों का कहना है कि लैंपस द्वारा यदि राशि की भुगतान नहीं किया गया, तो प्रबंधन के ऊपर राशि गबन का केश किया जायेगा. खाताधारियों में इस मामले को लेकर काफी नाराजगी है. खाताधारियों का यह भी कहना है कि प्रबंधन समिति में जितने भी सदस्य हैं, उनके नाम के साथ केश किया जायेगा.
शहर में है चर्चा
शहर में चर्चा है कि लैंपस प्रबंधन समिति के सदस्यों की मिलीभगत है. यह भी कहा जा रहा है कि प्रबंधन समिति द्वारा कई लोगों को ऋण दे दिया गया है. साथ ही कई लोगों को वाहन भी ऋण के तौर पर उपलब्ध कराये गये हैं. ऋण लेने वाले अधिकतर प्रबंधन समिति के सदस्यों के सगे संबंधी हैं. ऋण धारकों द्वारा ऋण के पैसे जमा भी नहीं किये जा रहे हैं.
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