झारखंड के कुचाई के टुसू मेले में 35 फीट के चौड़ल का जलवा, महिलाओं के डांस ने जमाया रंग

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :24 Jan 2026 1:49 PM (IST)
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Saraikela-Kharsawan News

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड में लगे ट्सू मेले में 35 फीट का चौड़ल्.

Saraikela-Kharsawan News: सरायकेला-खरसावां के कुचाई ब्लॉक के सेकरेडीह और तमाड़ के आराहंगा गांव के बीच लगे ट्रेडिशनल टुसू मेले में चौड़ल और महिलाओं के फॉक डांस ने लोगों का दिल जीत लिया. बसंती पंचमी पर लगे इस मेले में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे. 35 फीट ऊंचे चौड़ल को फर्स्ट प्राइज मिला. विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि टुसू पर्व झारखंड की रिच कल्चरल हेरिटेज और सामाजिक भाईचारे का साइन है. तस्वीर में जो सबसे लंबा मीनार दिख रहा है, वही चौड़ल है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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खरसावां से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Saraikela-Kharsawan News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां के कुचाई ब्लॉक के सीमावर्ती सेकरेडीह और तमाड़ (रांची) के आराहंगा गांव के बीच स्थित मैदान में बसंती पंचमी पर ट्रेडिशनल टुसू मेला लगाया गया. टुसू मेला का उद्घाटन लोकल एमएलए दशरथ गागराई ने किया. टुसू मेला में कुचाई और तमाड़ के गांवों से महिलाएं पारंपरिक चौड़ल ले कर पहुंचीं. इन महिलाओं ने चौड़ल के सामने ट्रेडिशन फॉकडांस पर डांस करके रंग जमा दिया. टुसू मेले में पब्लिक फेथ, ट्रेडिशन और कल्चरल हेरिटेज का जीवंत रूप दिखा. हजारों लोग टुसू के रंग सरोबर दिखे.

पियाकुली के 35 फीट ऊंचे चौड़ल को मिला फर्स्ट प्राइज

टुसू मेला में तमाड़ के पियाकुली का 35 फीट ऊंचा चौड़ल अट्रैक्शन का सेंटर बना रहा. खरसावां एमएलए दशरथ गागराई ने इस चौड़ल टीम को फर्स्ट प्राइज के तौर पर 10,000 हजार रुपये दे कर ऑनर किया. चौड़ल को काफी अट्रैक्टेड बनाया गया था. दूर से ही चौड़ल की लाइट दिखाई दे रही थी. चौड़ल कमिटी पियाकुली की महिलाओं ने बताया कि हर साल उनकी टीम टुसू मेलों में चौड़ल ले कर पहुंचती है. इसके जरिए अपने कल्चर और ट्रेडिशन को प्रोटेक्ट किया जा रहा है. पिछले करीब एक महीने तक लगातार मेनतन कर इस चौड़ल को बनाया है.

कुचाई के बुरुबांडी के चौड़ल को मिला सेकंड प्राइज

चौड़ल कंपीटिशन में कुचाई के बुरुबांडी के चौड़ल को सेकंड प्राइज के तौर पर सात हजार, चांडिल के चौड़ल को थर्ड प्राइज के तौर पर पांच हजार और कुचाई के कुदाडीह के चौड़ल को फोर्थ प्राइज के तौर पर दो हजार रुपये का प्राइज दिया गया.

छोपोल-छापोल डांस से समां बांधा

इस प्रोग्राम में डीजे डांस ग्रुप के आर्टिस्ट ने छोपोल छापोल आदिवासी डांस से समां बांध दिया. ट्रेडिशनल आदिवासी म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट की धुन पर ट्रेडिशनल ड्रेस पहने आर्टिस्ट ने डासं कर प्रोग्राम को मजेदार बना दिया.

रिच कल्चरल हेरिटेज का साइन है टुसू पर्व : दशरथ गागराई

अवॉर्ड डिस्ट्रीब्यूशन प्रोग्राम में खरसावां एमएलए दशरथ गागराई ने कहा कि टुसू पर्व यहां के रिच कल्चरल हेरिटेज का साइन है. टुसू मेला से सोशल भाईचारे की भावना मजबूत हो रही है. इससे यहां के रिच कल्चर और ट्रेडिशन के साथ-साथ गांव के स्पोर्ट्स टैलेंट को प्लेटफॉर्म मिल रहा है. उन्होंने एरिया के कल्चरल हेरिटेज और ट्रेडिशन्स को स्ट्रॉन्ग बनाने पर जोर देते हुए यूथ को आगे आने की अपील की. गागराई ने कहा कि साल दर साल टुसू मेला की भव्यता बढ़ना एक सुखद अनुभूति है.

मेले में कौन-कौन रहे मौजूद

टुसू मेले में मुख्य रूप से तमाड़ के जिप मेंबर भवानी मुंडा, कुचाई के एमएएलए रिप्रेजेंटेटिव धर्मेंद्र मुंडा, राम सोय, राहुल सोय, चंद्र मोहन मुंडा, शंभू मुंडा, कारु मुंडा, ऑर्गेनाइजिंग कमिटी के चेयरमैन बहादुर मुंडा, सोहन मुंडा, प्रभुदेवा टाव, प्रधान मुंडा, सोहन सिंह मुंडा आदि मौजूद रहे. यहां पहुंचने पर एमएलए दशरथ गागराई का ट्रेडिशनल रीति-रिवाज के साथ वेलकम किया गया.

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दो जिले के दो गांव के लोग लगाते हैं मेला

सरायकेला-खरसावां और रांची के सीमावर्ती गांव सेकरेडीह (कुचाई) और आराहंगा (तमाड़) के लोग आपसी तालमेल से मेला लगाते हैं. दोनों गांव के बीच मैदान में हर साल बसंती पंचमी पर ट्रेडिशनल टुसू मेला लगता है. इस मेले में दोनों जिलों से लोग पहुंचते है. मेला के जरिये न सिर्फ लोकल कल्चर और ट्रेडिशन को प्रोटेक्शन मिल रहा है, बल्कि आपस में लोगों का भाईचारा भी बना हुआ है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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