सरायकेला के बेलडीह में धूमधाम से मना ‘मागे पोरोब’, विधायक दशरथ गागराई भी थे शामिल 

Updated:
विज्ञापन
Saraikela News

मांदर पर थाप लगाते हुए विधायक दशरथ गागराई (हरे रंग की लूंगी) के साथ ग्रामीण फोटो: प्रभात खबर

Saraikela News: सरायकेला राजनगर के बेलडीह गांव में पारंपरिक रुप से ‘मागे पोरोब’ पर्व मनाया गया. इस दौरान विधायक दशरथ गागराई ने दी मांदर पर थाप. सभी ग्रामीणों ने किया नृत्य. साथ ही अपनी संस्कृतिक व परंपरा को संरक्षित रखने पर भी दिया जोर.

विज्ञापन

सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Saraikela News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड के बेलडीह गांव में पारंपरिक रुप से मागे पोरोब का आयोजन किया गया. मागे पोरोब में विधायक दशरथ गागराई अपनी पत्नी बासंती गागराई के साथ पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए. इस दौरान सभी रश्मों को निभाया गया. मागे पर्व में विधायक दशरथ गागराई एक मंझे हुए कलाकार के रुप में नजर आएं. यहां उन्होंने मांदर व नगाड़े पर थाप देने के साथ समाज के लोगों के साथ नृत्य भी किया. इस दौरान हो भाषा में मागे गीत को अलग अलग अंदाज में पेश कर समां बांध दिया. निमिन बुगिन मागे जो पोरोब, रांसा आदाओआ, बाटी गोजेन बाटी गोजेन…मागे ना पोरोब, ताराबु मेनटे, निमिन बुगिन मागे ना पोरोब… आदि मागे गीतों पर लोग मांदर की थाप पर झूमते नजर आ रहे थे. 

संस्कृति व परंपरा से जुड़ा हुआ है मागे पोरोब : गागराई 

इस मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि मागे पोरोब क्षेत्र की परंपरा व संस्कृति से जुड़ा हुआ है. विधायक दशरथ गागराई ने उपस्थित लोगों से अपनी संस्कृति व परंपरा के लिए कार्य करने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह पर्व आपसी भाईचारा बनाएं रखने तथा एक-दूसरे को सहयोग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उन्होंने लोगों को मागे पर्व की बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से सामाजिक एकजुटता बनी रहती है. 

देशाउलि में पारंपरिक विधि-विधान के साथ मागे पोरोब मनाया गया 

देशाउलि में पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई पूजा. इस कार्यक्रम में ग्रामीण भी रहे मौजूद. मागे पोरोब की शुरुआत देशाउलि में पूजा अर्चना के साथ हुई. गांव के दियुरी ने देशाउलि में पारंपरिक विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की. इसके बाद सभी रश्मों को निभाया गया. मागे पर्व में शामिल होने के लिए गांव के हर घर में सगे संबंधी भी पहुंचे थे. सभी लोग झूमते नजर आ रहे थे. कार्यक्रम में मुख्य रुप से बासंती गागराई, संजय हांसदा, मल्लीक तियु, लकड़ा तियु, दिलीप तियु, नारायण हांसदा, सोमा तियु, गोपी तियु, आईशा तियु, पुतुल हांसदा, प्रिया तियु, अजय हांसदा, नीना तियु समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.    

हो (Ho) जनजाति का एक प्रमुख और सबसे बड़ा वार्षिक पारंपरिक त्योहार है ‘मागे पोरोब’

मागे पोरोब (Mage Porob) झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की हो (Ho) जनजाति का एक प्रमुख और सबसे बड़ा वार्षिक पारंपरिक त्योहार है. झारखंड के कोल्हान में इस पर्व का आयोजन बड़े पैमाने पर होता है. यह हो समाज के लिए आदि धर्म व संस्कृति, यानी सृष्टि रचना और मानव उत्पत्ति का पर्व है. यह त्योहार आमतौर पर 7-8 दिनों तक चलता है. इसमें ओते इलि, गौ महरा, जातरा पोरोब, हर मागे और बासी पोरोब जैसे अनुष्ठान शामिल होते हैं. यह त्योहार सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनूठा उदाहरण है.

इसे भी पढ़ें: हरे कृष्ण के जयकारे से गूंजा सरायकेला का मुरुप, अर्जुन मुंडा ने संकीर्तन में भाग लिया

इसे भी पढ़ें: सरायकेला के तिरुलडीह में तीन जंगली हाथियों की दस्तक, ग्रामीणों में दहशत का माहौल

विज्ञापन
प्रिया गुप्ता

लेखक के बारे में

By प्रिया गुप्ता

प्रिया गुप्ता पिछले एक साल से प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola