सरायकेला के बेलडीह में धूमधाम से मना ‘मागे पोरोब’, विधायक दशरथ गागराई भी थे शामिल 

Updated at : 29 Mar 2026 1:54 PM (IST)
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Saraikela News

मांदर पर थाप लगाते हुए विधायक दशरथ गागराई (हरे रंग की लूंगी) के साथ ग्रामीण फोटो: प्रभात खबर

Saraikela News: सरायकेला राजनगर के बेलडीह गांव में पारंपरिक रुप से ‘मागे पोरोब’ पर्व मनाया गया. इस दौरान विधायक दशरथ गागराई ने दी मांदर पर थाप. सभी ग्रामीणों ने किया नृत्य. साथ ही अपनी संस्कृतिक व परंपरा को संरक्षित रखने पर भी दिया जोर.

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सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Saraikela News: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड के बेलडीह गांव में पारंपरिक रुप से मागे पोरोब का आयोजन किया गया. मागे पोरोब में विधायक दशरथ गागराई अपनी पत्नी बासंती गागराई के साथ पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए. इस दौरान सभी रश्मों को निभाया गया. मागे पर्व में विधायक दशरथ गागराई एक मंझे हुए कलाकार के रुप में नजर आएं. यहां उन्होंने मांदर व नगाड़े पर थाप देने के साथ समाज के लोगों के साथ नृत्य भी किया. इस दौरान हो भाषा में मागे गीत को अलग अलग अंदाज में पेश कर समां बांध दिया. निमिन बुगिन मागे जो पोरोब, रांसा आदाओआ, बाटी गोजेन बाटी गोजेन…मागे ना पोरोब, ताराबु मेनटे, निमिन बुगिन मागे ना पोरोब… आदि मागे गीतों पर लोग मांदर की थाप पर झूमते नजर आ रहे थे. 

संस्कृति व परंपरा से जुड़ा हुआ है मागे पोरोब : गागराई 

इस मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि मागे पोरोब क्षेत्र की परंपरा व संस्कृति से जुड़ा हुआ है. विधायक दशरथ गागराई ने उपस्थित लोगों से अपनी संस्कृति व परंपरा के लिए कार्य करने की अपील की. उन्होंने कहा कि यह पर्व आपसी भाईचारा बनाएं रखने तथा एक-दूसरे को सहयोग करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उन्होंने लोगों को मागे पर्व की बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से सामाजिक एकजुटता बनी रहती है. 

देशाउलि में पारंपरिक विधि-विधान के साथ मागे पोरोब मनाया गया 

देशाउलि में पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई पूजा. इस कार्यक्रम में ग्रामीण भी रहे मौजूद. मागे पोरोब की शुरुआत देशाउलि में पूजा अर्चना के साथ हुई. गांव के दियुरी ने देशाउलि में पारंपरिक विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की. इसके बाद सभी रश्मों को निभाया गया. मागे पर्व में शामिल होने के लिए गांव के हर घर में सगे संबंधी भी पहुंचे थे. सभी लोग झूमते नजर आ रहे थे. कार्यक्रम में मुख्य रुप से बासंती गागराई, संजय हांसदा, मल्लीक तियु, लकड़ा तियु, दिलीप तियु, नारायण हांसदा, सोमा तियु, गोपी तियु, आईशा तियु, पुतुल हांसदा, प्रिया तियु, अजय हांसदा, नीना तियु समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.    

हो (Ho) जनजाति का एक प्रमुख और सबसे बड़ा वार्षिक पारंपरिक त्योहार है ‘मागे पोरोब’

मागे पोरोब (Mage Porob) झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की हो (Ho) जनजाति का एक प्रमुख और सबसे बड़ा वार्षिक पारंपरिक त्योहार है. झारखंड के कोल्हान में इस पर्व का आयोजन बड़े पैमाने पर होता है. यह हो समाज के लिए आदि धर्म व संस्कृति, यानी सृष्टि रचना और मानव उत्पत्ति का पर्व है. यह त्योहार आमतौर पर 7-8 दिनों तक चलता है. इसमें ओते इलि, गौ महरा, जातरा पोरोब, हर मागे और बासी पोरोब जैसे अनुष्ठान शामिल होते हैं. यह त्योहार सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनूठा उदाहरण है.

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Priya Gupta

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By Priya Gupta

प्रिया गुप्ता प्रभात खबर के लाइफस्टाइल बीट पर 1 साल से काम कर रही हैं. यहां वे हेल्थ, फैशन और भी ट्रेंड से जुड़ी आर्टिकल लिखती हैं. ये हर लेख को दिल से लिखती है, जो पाठकों को सिर्फ जानकारी नहीं, एक एहसास पहुंचा सकें.

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