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Seraikela Kharsawan News : 1.10 करोड़ खर्च के बाद भी नहीं चले ऑक्सीजन प्लांट

Updated at : 30 Dec 2025 12:08 AM (IST)
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Seraikela Kharsawan News : 1.10 करोड़ खर्च के बाद भी नहीं चले ऑक्सीजन प्लांट

सरायकेला : सदर अस्पताल व कुचाई सीएचसी में बने प्लांट बने शोभा की वस्तु

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सरायकेला.

कोविड-19 महामारी के दौरान आपात स्थिति से निपटने के लिए सरायकेला सदर अस्पताल और कुचाई सीएचसी में करीब 1.10 करोड़ रुपये की लागत से दो ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किये गये थे, ताकि भविष्य में ऑक्सीजन की कोई कमी न हो. लेकिन निर्माण के बाद एक बार भी इन प्लांटों का उपयोग नहीं किया गया. फिलहाल, दोनों प्लांट अस्पताल की शोभा तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन बंद पड़े हैं. इनका संचालन न होने का प्रमुख कारण अस्पताल में ऑक्सीजन की खपत बेहद कम होना बताया गया. प्लांट चलाकर ऑक्सीजन तैयार करने पर लागत बाजार से सिलिंडर खरीदने की तुलना में कहीं अधिक आती है. अस्पताल प्रबंधन बाहरी आपूर्तिकर्ताओं से नियमित रूप से सिलिंडर मंगाकर उपयोग करता है, क्योंकि इससे खर्च प्लांट चालू करने की लागत के आधे से भी कम पड़ता है. यही वजह है कि सदर अस्पताल और कुचाई सीएचसी के दोनों ऑक्सीजन प्लांट अब तक निष्क्रिय पड़े हैं.

एक मिनट में 500 लीटर ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता

सदर अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट की क्षमता 500 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) है. यानी यह प्लांट एक मिनट में 500 लीटर ऑक्सीजन बना सकता है.

प्लांट चालू करने की लागत अधिक

अस्पताल में फिलहाल ऑक्सीजन की आपूर्ति सिलिंडर और कंसेंट्रेटर के माध्यम से की जाती है. बताया गया है कि प्लांट चालू करने पर बिजली और रख-रखाव की लागत रिफिलिंग खर्च की तुलना में काफी अधिक आती है. इस वजह से अस्पताल सिलिंडर रिफिलिंग के लिए आदित्यपुर से ऑक्सीजन मंगाने का विकल्प चुनता है.

सदर अस्पताल में खपत बहुत कम

सदर अस्पताल में ऑक्सीजन की खपत बहुत सीमित है. यहां सिर्फ गंभीर मरीजों के आने पर कभी-कभार ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, जो इलेक्ट्रिक कंसेंट्रेटर से पूरी कर ली जाती है.

सिलिंडरों की पर्याप्त उपलब्धता

सदर अस्पताल में ऑक्सीजन भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था है. वर्तमान में अस्पताल के पास 104 छोटे सिलिंडर, 56 बड़े सिलिंडर और 36 जंबो सिलिंडर उपलब्ध हैं. इसके अलावा 18 इलेक्ट्रिक ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर भी संचालित हैं, जिनसे अस्पताल की जरूरत पूरी हो जाती है.प्लांट चालू कर ऑक्सीजन उत्सर्जन से लागत बहुत अधिक आता है, जो सिलिंडर के रिफिलिंग करने के दो से तीन गुना अधिक खर्च होता है. वर्तमान में जितनी आवश्यकता होती है उससे सिलिंडर से पूरा कर लिया जाता है –

डॉ नकुल चौधरी

, उपाधीक्षक, सरायकेला सदर अस्पताल

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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