खरसावां-रड़गांव सड़क पर गड्ढों में जलजमाव से बढ़ी मुसीबत, हादसे का बढ़ा खतरा

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खरसावां-रड़गांव सड़क पर गड्ढों में जलजमाव से बढ़ी मुसीबत, हादसे का बढ़ा खतरा

तसवीर : खरसावां-रड़गांव सड़क पर रायजामा-कांडेरकुटी के पास सड़क पर बने गड्ढों में जलजमाव से बढ़ी मुसीबत, | Prabhat Khabar Network

खरसावां-रड़गांव सड़क पर बने गहरे गड्ढों और जलजमाव से राहगीर परेशान हैं। सड़क की बदहाली से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, प्रशासन सुधार की तैयारी में जुटा है।

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खरसावां-रड़गांव सड़क पर रायजामा-कांडेरकुटी के पास सड़क पर बने गड्ढों में जलजमाव से बढ़ी मुसीबत, शचींद्र कुमार दाश की रिपोर्ट खरसावां. सरायकेला-खरसावां जिले को टाटा-रांची एनएच-33 से जोड़ने वाली खरसावां-रड़गांव आरसीडी सड़क बारिश के मौसम में राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन गई है. करीब 30 किलोमीटर लंबी इस महत्वपूर्ण सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हो गए हैं और कई स्थानों पर पिच पूरी तरह उखड़ चुका है. गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से वाहन चालकों को गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी हुई है. सबसे अधिक परेशानी रायजामा घाटी के समीप हो रही है, जहां बड़े गड्ढों में छोटे-बड़े वाहन अक्सर फंस जा रहे हैं.

दोपहिया चालकों के लिए बढ़ा खतरा जगह से जगह पर सड़क की पिच उखड़ने के बाद गिट्टियां बाहर निकल आई हैं. वहीं बारिश के दौरान पहाड़ी से मिट्टी और पत्थरों का मलबा भी सड़क पर आ रहा है. इससे दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है. ब्रेक लगाते ही बाइक फिसलने का खतरा बना रहता है और आए दिन छोटी-छोटी दुर्घटनाएं हो रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण इस मार्ग पर सफर जोखिमभरा हो गया है. जगह-जगह बने स्पीड ब्रेकर भी परेशानी बढ़ा रहे हैं. खरसावां से रांची, बुंडू, तमाड़ एवं आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने वाले हजारों लोग प्रतिदिन इसी सड़क का उपयोग करते हैं. स्थानीय विधायक दशरथ गागराई भी कई बार विधानसभा में इस सड़क की राइडिंग क्वालिटी में सुधार का मामला उठा चुके हैं.

राइडिंग क्वालिटी सुधारने के लिए तैयार हो रहा डीपीआर पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख के निर्देश पर खरसावां-रड़गांव सड़क की राइडिंग क्वालिटी सुधारने के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया जा रहा है. विभाग के सहायक अभियंता ललित नायक ने बताया कि डीपीआर तैयार करने का कार्य तेजी से चल रहा है और जल्द ही इसे विभाग को सौंप दिया जाएगा. योजना के तहत सड़क की राइडिंग क्वालिटी सुधारने के साथ-साथ आवश्यक स्थानों पर गार्डवाल निर्माण का भी प्रस्ताव है. जानकारी के अनुसार सड़क की राइडिंग क्वालिटी के सुधार के लिए करीब 26 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार किया गया है. साथ ही सड़क कीनारे गार्डवाल निर्माण के लिए भी अलग से डीपीआर तैयार किया जा रहा है.

54 करोड़ की सड़क चार-पांच साल में हुई जर्जर जानकारी के अनुसार खरसावां से रड़गांव तक सड़क के चौड़ीकरण एवं जीर्णोद्धार पर करीब 54 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. वर्ष 2011-12 में इस सड़क को ग्रामीण अभियंत्रण संगठन (आरईओ) से पथ निर्माण विभाग को हस्तांतरित किया गया था. वर्ष 2014-15 में निर्माण कार्य शुरू हुआ और वर्ष 2021-22 में पूरा हुआ. लेकिन निर्माण के महज चार-पांच वर्ष बाद ही सड़क जगह-जगह उखड़ने लगी और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए. ओवरलोड वाहनों पर उठ रहे सवाल स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की कमी और ओवरलोड वाहनों के परिचालन के कारण सड़क समय से पहले जर्जर हो गई.

उनका कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में बालू लदे भारी वाहन गुजरते हैं, जिससे सड़क पर लगातार अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है. इसके बावजूद संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से सड़क की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. 50 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने को मजबूर लोग सड़क की बदहाली से परेशान होकर अब कई लोग वैकल्पिक मार्ग का सहारा लेने लगे हैं. खरसावां से रांची जाने वाले लोग सरायकेला, कांड्रा और चौका होकर आवागमन कर रहे हैं. इससे उन्हें लगभग 50 से 55 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. स्थानीय लोगों ने अविलंब सड़क की मरम्मत, गड्ढों की भराई तथा राइडिंग क्वालिटी में सुधार की मांग की है, वर्तमान समय में आवागमन में किसी तरह की परेशानी का सामना करना न पड़े.


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Sachindra Dash

लेखक के बारे में

By Sachindra Dash

शचिंद्र कुमार दाश प्रभात खबर के वरीय संवाददाता हैं और हिंदी पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। वे झारखंड और ओडिशा की राजनीति, प्रशासन, ग्रामीण विकास, सामाजिक सरोकार, कानून-व्यवस्था तथा जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग करते हैं। इसके साथ ही कला, भाषा, संस्कृति, आध्यात्म और समसामयिक विषयों पर लेखन में उनकी विशेष रुचि है। नई जानकारियां जुटाना और उन्हें प्रमाणिक तथ्यों के साथ पाठकों तक पहुंचाना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषता है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, खेल, पर्यावरण, साहित्य, संस्कृति से जुड़े विषयों को समेटती है। शचिंद्र कुमार दाश ग्राउंड रिपोर्टिंग पर विशेष जोर देते हैं। वे घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों के आधार पर समाचार प्रस्तुत करने तथा आम लोगों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करते हैं।

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