खरसावां गोलीकांड: शहीदों और घायलों के परिजनों को नौकरी और पेंशन की मांग, सरकार जल्द करे पहचान
डीसी ऑफिस के बाहर खड़े स्थानीय लोग.
Kharsawan Firing Incident: खरसावां गोलीकांड (1 जनवरी 1948) में शहीद और घायल हुए आंदोलनकारियों के आश्रित परिवारों को सरकारी मुआवजा, नौकरी और पेंशन देने की मांग तेज हो गई है1 इस मांग को लेकर शुक्रवार को हस्ताक्षर अभियान चलाकर सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें शहीदों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की गई1
शचिंद्र कुमार दाश
Kharsawan Firing Incident: एक जनवरी 1948 को खरसावां गोली कांड की घटना में शहीद और घायल हुए आंदोलनकारियों के आश्रित परिवारों को सरकारी मुआवजा, नौकरी और पेंशन देने की मांग तेज हो गयी है. इसको लेकर शुक्रवार को एक हस्ताक्षर अभियान चलाकर एक ज्ञापन सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त को सौंपा गया. सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया है कि खरसावां गोली कांड की घटना को 78 साल बीत चुके हैं. उपायुक्त से इस गोली कांड में शहीद और घायल हुए लोगों के चिह्नित करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए और उनकी पहचान की जाए.
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सरकार से इस घटना में शहीद और घायलों की चिह्नितिकरण के लिये एक पूर्णकालिक न्याय जांच आयोग का गठन करने की भी मांग की गयी. साथ ही गुवा गोली कांड के तर्ज पर खरसावां गोली कांड में शहीद और घायलों के आश्रित परिवारों को सरकारी मुआवजा, नौकरी और पेंशन देने की मांग की गई है. ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से राम चंद्र सोय, डिबार डांगिल, उदय बंकिरा, राम लाल सोय, मंगल सिंह गागराई, जय प्रकाश डांगिल, चंद्र मोहन सोय, बलवीर सिंह बिरूवा, सोना राम हांसदा, गुमन बोदरा, बिटु राम सोय, नंदु बोदरा, हरि लाल दोराई सहित कोल्हन के तीनों जिले के लोग शामिल थे.
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