‘खरसावां गोलीकांड’ की घटना पर बनने वाली फिल्म की मई से शुरू होगी शूटिंग, 1 जनवरी 2027 को रिलीज

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :13 Apr 2026 8:09 PM (IST)
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Seraikela News

‘खरसावां गोलीकांड’ का समाधि स्थल

Seraikela News: खरसावां गोलीकांड 1948 की घटना पर आधारित फिल्म की शूटिंग मई से शुरू होगी और 1 जनवरी 2027 को रिलीज की जाएगी. लक्ष्मण मुर्मू के निर्देशन में बन रही इस फिल्म में स्थानीय कलाकारों को मौका मिलेगा और यह नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का प्रयास करेगी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Seraikela News: झारखंड के खरसावां में 1 जनवरी 1948 को हुए ऐतिहासिक गोलीकांड की घटना अब बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी. राहुल गागराई प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनने वाली यह फिल्म न केवल इतिहास को जीवंत करेगी, बल्कि नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान से भी परिचित कराएगी. इस फिल्म को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है.

मई से शुरू होगी शूटिंग, 2027 में रिलीज का लक्ष्य

करीब डेढ़ करोड़ रुपये के बजट से बनने वाली इस फिल्म की शूटिंग मई महीने से शुरू की जाएगी. फिल्म की शूटिंग खरसावां समेत कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न लोकेशनों पर की जाएगी. निर्माण टीम का लक्ष्य जुलाई तक शूटिंग पूरी करने का है. इसके बाद फिल्म को 1 जनवरी 2027, यानी खरसावां शहीद दिवस के अवसर पर रिलीज करने की योजना बनाई गई है.

लक्ष्मण मुर्मू संभालेंगे निर्देशन की कमान

इस फिल्म की कहानी और पटकथा ओड़िशा के मयूरभंज निवासी लक्ष्मण मुर्मू ने लिखी है. वे ही फिल्म के निर्देशक की भूमिका भी निभाएंगे. लक्ष्मण मुर्मू इससे पहले ‘जाहेर आयोआ थिड़ी रे सोना सिकड़ी’, ‘फागुन पोनाई’, ‘काडो कुइली’ और ‘प्रेम पासे’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं. उनके अनुभव से इस फिल्म को एक सशक्त प्रस्तुति मिलने की उम्मीद है.

विधायक दशरथ गागराई निभाएंगे अहम किरदार

खरसावां के झामुमो विधायक दशरथ गागराई इस फिल्म में ग्राम मुंडा की भूमिका में नजर आएंगे. वे पहले भी हो भाषा की कई फिल्मों और एलबम में अभिनय कर चुके हैं. राजनीति के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता के लिए फिल्मों का माध्यम अपनाना उनकी खास पहचान बन चुका है.

स्थानीय और बाहरी कलाकारों का होगा संगम

फिल्म में 60 से 70 स्थानीय कलाकारों को अभिनय का मौका दिया जाएगा. इसके साथ ही ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के कलाकार भी फिल्म का हिस्सा बनेंगे. तकनीकी टीम में भी बाहरी विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा, जिससे फिल्म की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके. सेट डिजाइन और प्रोडक्शन के लिए अनुभवी टेक्नीशियनों की मदद ली जाएगी.

लोकेशन सर्वे और तथ्य संग्रह का काम जारी

फिल्म की प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए टीम द्वारा विभिन्न लोकेशनों का दौरा किया जा रहा है. लेखक एवं निर्देशक लक्ष्मण मुर्मू, विधायक दशरथ गागराई, कॉस्ट्यूम डिजाइनर नितिमा जोंको और अन्य कलाकारों ने खरसावां गोलीकांड से जुड़े क्षेत्रों का भ्रमण कर ऐतिहासिक तथ्यों का संग्रह किया है. इससे फिल्म को वास्तविकता के करीब लाने में मदद मिलेगी.

कलाकारों के लिए ऑडिशन की घोषणा

स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से फिल्म के लिए ऑडिशन आयोजित किए जाएंगे. 15 अप्रैल को चाईबासा, 16 अप्रैल को जमशेदपुर और 19 अप्रैल को खरसावां में ऑडिशन रखा गया है. चाईबासा में तांबो चौक के पास वन विभाग के गेस्ट हाउस, जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित आदिवासी कला भवन और खरसावां के कला संस्कृति भवन में कलाकार अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगे.

नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की पहल

विधायक दशरथ गागराई के अनुसार, यह फिल्म खासतौर पर नई पीढ़ी को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है. उनका मानना है कि आज की युवा पीढ़ी को अपने इतिहास और पूर्वजों के बलिदान के बारे में जानकारी होना जरूरी है. यह फिल्म उन्हें अपने अतीत से जोड़ने का काम करेगी.

बहुभाषी रिलीज की भी योजना

निर्माताओं की योजना इस फिल्म को केवल हो भाषा तक सीमित न रखकर हिंदी, ओड़िया और संथाली समेत अन्य भाषाओं में भी डब करने की है. इससे फिल्म को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाया जा सकेगा.

खरसावां गोलीकांड: इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय

1 जनवरी 1948 को हुआ खरसावां गोलीकांड झारखंड के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील अध्याय है. इस घटना में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. यह फिल्म उसी ऐतिहासिक घटना को पर्दे पर लाकर लोगों को उस दौर की सच्चाई से रूबरू कराएगी.

फिल्म से क्षेत्रीय सिनेमा को मिलेगा बढ़ावा

इस फिल्म के जरिए न केवल इतिहास को संजोने का प्रयास किया जा रहा है, बल्कि क्षेत्रीय सिनेमा को भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है. स्थानीय कलाकारों को अवसर मिलने से उनकी प्रतिभा को मंच मिलेगा और क्षेत्रीय फिल्म उद्योग को भी मजबूती मिलेगी.

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सामाजिक संदेश के साथ मनोरंजन का संगम

यह फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होगी, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश भी देगी. इतिहास, संस्कृति और संघर्ष की कहानी को दर्शाते हुए यह फिल्म दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने का प्रयास करेगी.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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