Seraikela Kharsawan news:धन पर घमंड न करें, प्रेम के भूखे हैं भगवान : पं महेंद्र शर्मा

Updated at : 20 Feb 2025 12:25 AM (IST)
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Seraikela Kharsawan news:धन पर घमंड न करें, प्रेम के भूखे हैं भगवान : पं महेंद्र शर्मा

सरायकेला में श्रीमद् भागवत महापुराण कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया. इस दौरान महिलाओं ने कलश यात्रा निकली.

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सरायकेला में श्रीमद् भागवत महापुराण कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया. इस दौरान महिलाओं ने कलश यात्रा निकली.सीनी/सरायकेला. सरायकेला प्रखंड की कमलपुर पंचायत के घोड़ालांग गांव में श्रीमद् भागवत प्रचारक समिति की ओर से श्रीमद् भागवत महापुराण कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ कलश यात्रा से हुआ. कलश यात्रा बांकसाही के राजाघाट ( सोना नदी) से वैदिक मंत्रोच्चार से शुरू हुआ. 121 महिलाएं कलश लेकर तीन किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए यज्ञ स्थल पहुंची और कलश को स्थापित किया. कलश यात्रा के बाद दोपहर में पूजा और पुष्पांजलि का आयोजन किया गया. शाम में वृंदावन से पधारे कथावाचक पंडित महेंद्र शर्मा ने भागवत कथा का शुभारंभ किया. मौके पर भद्रनाथ महतो, नंदलाल उरांव, घसीराम महतो, विमल सरदार, मृत्युंजय उरांव, अरविंद उरांव, घनश्याम महतो, मनोज कुमार महतो, सनत दास, हेमंत महतो, डोमन महतो व जगन्नाथ महतो मौजूद थे.

भक्ति, ज्ञान व वैराग्य की महिमा पर कथावाचन

महाराज जी ने भक्तों को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की महिमा के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि संसार में प्रेम सर्वोपरि है. निश्छल प्रेम व धर्म का निरंतर पालन करने से भगवान को भी प्राप्त किया जा सकता है. परिवार में सदैव प्रेम की भावना बनी रहनी चाहिए. दुर्योधन में ईर्ष्या बहुत थी. उसने कभी प्रेम करना नहीं सीखा, जिसके कारण कौरवों की संख्या सैकड़ों होने के बावजूद भी उनका विनाश हो गया. जबकि पांडव मात्र पांच थे.

इनसान को चरित्रवान होना चाहिए

महाराज जी ने कहा कि इंसान को कभी अर्थ (धन) का दास नहीं होना चाहिए. धन पर घमंड भी नहीं करना चाहिए. राजा बलि धनवान थे. वे निरंतर धर्म के कार्यों में सदैव आगे रहते थे. लेकिन उनके अंदर कहीं न कहीं अपने धनवान होने का घमंड था. जिसके कारण वामन रूप में आये भगवान को पहचान न सके और भगवान को मात्र तीन पग भूमिदान करने के चक्कर में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर बैठे. कहा कि इंसान को चरित्रवान होना चाहिए. भगवान राम ने हमेशा अपनी मर्यादा का पालन किया. भगवान कृष्ण की महिमा का बखान करते हुए महाराज जी ने कहा कि भगवान प्रेम के भूखे होते हैं. रामावतार में प्रेम के वशीभूत होकर भगवान ने शबरी के जूठे बेर खाये. अपने कृष्ण अवतार में भगवान ने प्रेम के वशीभूत गोपियों संग रास रचाया. कथा की समाप्ति पर भगवान की आरती उतारी गयी.

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