seraikela kharsawan news: चैत्र पर्व सह महोत्सव आज से, तीनों छऊ शैलियों संग लोक नृत्यों का दिखेगा संगम

Updated at : 11 Apr 2025 12:51 AM (IST)
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seraikela kharsawan news: चैत्र पर्व सह महोत्सव आज से, तीनों छऊ शैलियों संग लोक नृत्यों का दिखेगा संगम

सरायकेला के बिरसा स्टेडियम में तीन दिवसीय चैत्र महोत्सव का आज रंगारंग आगाज

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सरायकेला. राज्य सरकार के कला, खेलकूद एवं सांस्कृतिक मंत्रालय और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय चैत्र पर्व सह महोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार(11 अप्रैल) को रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ होगा. इस भव्य आयोजन का मंच स्थानीय बिरसा स्टेडियम में सजा है, जहां झारखंड सरकार के परिवहन एवं भू-राजस्व मंत्री दीपक बिरुवा उद्घाटन करेंगे.

लोक विरासत व सांस्कृतिक परंपराओं को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे कलाकार

महोत्सव में सरायकेला, खरसावां और मानभूम की तीनों छऊ शैलियों के साथ कथक, ओडिसी, राजस्थानी कालबेलिया, असम का भोरथल, ओडिशा का शंख और सिंह नृत्य, फिरकाल, मागे, मुंडारी, झुमर जैसे पारंपरिक लोक नृत्यों की झलक देखने को मिलेगी. कलाकार अपनी लोक विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोहेंगे.

यात्रा घट के मंगलाचारण से होगा शुभारंभ, पहले दिन छऊ नृत्य और शास्त्रीय प्रस्तुतियां

कार्यक्रम की शुरुआत 11 अप्रैल की संध्या को यात्रा घट के मंगलाचारण से होगी. इसके बाद राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के कलाकार सरायकेला शैली का प्रदर्शन करेंगे. साथ ही सरायकेला, खरसावां और मानभूम के ग्रामीण छऊ दल भी प्रस्तुति देंगे. इस दिन प्रतिका मुखर्जी (अंगिका फाउंडेशन, पश्चिम बंगाल) द्वारा भरतनाट्यम, विश्वनाथ महतो (बोड़ाम) द्वारा नाटुवा नृत्य, नवीन कलाकेंद्र (कदमा) द्वारा कथक, युधिष्ठिर सरदार (पोटका) द्वारा फिरकाल, मनु साहू और दल (मध्य प्रदेश) द्वारा राजस्थानी कालबेलिया, लखन गुड़िया (खूंटी) द्वारा मुंडारी नृत्य, इचागढ़ के कलाकारों द्वारा पाइका नृत्य और गंजाम (ओडिशा) से आए कलाकारों द्वारा सिंह नृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे.

12 अप्रैल को लोक रंगों का विस्तार

12 अप्रैल को दूसरे दिन असम के प्रसेनजीत कर द्वारा भोरथल लोक नृत्य, गंजाम (ओडिशा) के कलाकारों द्वारा शंख नृत्य, गोपल महतो द्वारा झुमर गीत और मोमिता पाल (कोलकाता) द्वारा मोहिनी अट्टम की प्रस्तुति दी जाएगी. इसके साथ ही तीनों छऊ शैलियों का भी प्रदर्शन किया जाएगा.

13 अप्रैल को रात्रि जागरण और समापन

अंतिम दिन 13 अप्रैल को रात्रि जागरण के साथ केवल सरायकेला शैली के छऊ नृत्य का आयोजन किया जाएगा. इस दिन सरायकेला के विभिन्न छऊ दलों द्वारा विविध प्रस्तुतियां दी जाएंगी.

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