तसर के बाद अब कुचाई में होगी मलबाड़ी सिल्क की खेती

खरसावां : कुचाई की तसर सिल्क उद्योग की सफलता के बाद अब राज्य सरकार कुचाई के गांवों में मलबाड़ी सिल्क की खेती को बढ़ावा देगी. इस बावत कुचाई के पगारडीह, सांकोडीह, बाईडीह व तिलोपदा में करीब 40 एकड़ जमीन पर शहतूत का पौधरोपण किया गया है. अगले साल तक इन पौधों पर मलबाड़ी सिल्क की […]
खरसावां : कुचाई की तसर सिल्क उद्योग की सफलता के बाद अब राज्य सरकार कुचाई के गांवों में मलबाड़ी सिल्क की खेती को बढ़ावा देगी. इस बावत कुचाई के पगारडीह, सांकोडीह, बाईडीह व तिलोपदा में करीब 40 एकड़ जमीन पर शहतूत का पौधरोपण किया गया है. अगले साल तक इन पौधों पर मलबाड़ी सिल्क की खेती के लिए कीट पालन हो सकेगा.
चालू वित्तीय वर्ष में भी खरसावां कुचाई के कुछ ओर हिस्सों में शहतूत का पौधरोपण करने की योजना है. सिल्क के चार किस्मों में मलबाड़ी सिल्क सबसे उन्नत व विश्व में सर्वाधिक पसंद किये जाने वाला सिल्क कपड़ा है. झारखंड में इसकी खेती काफी कम होती है. मलवाड़ी सिल्क मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू व पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में होती है. प्रयोग के तौर पर अब कुचाई में भी इसे शुरू किया जा रहा है.
सफलता मिलने की स्थिति में आगे 360 एकड़ जमीन पर मलवाड़ी सिल्क की खेती कराने की योजना है. इसके लिए किसान समूहों का भी गठन किया जा रहा है. फिलहाल कुचाई में बड़े पैमाने पर तसर सिल्क की खेती होती है. मलबाड़ी सिल्क की खेती से किसानों को तसर सिल्क के मुकाबले रोजगार अधिक होने की संभावना व्यक्त की जा रही है.
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