मेला में आयीं हजारों महिलाएं

खरकई नदी के तट पर लगा मेला, महिलाओं ने की पूजा अब पुरुषों का भी होने लगा है प्रवेश सरायकेला : खरकई नदी के तट पर मिर्गी चिंगड़ा मेला में महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा. मकर संक्रांति के बाद शनिवार को लगने वाले मेले में सरायकेला, खरसावां, सीनी, जमशेदपुर के साथ ही पड़ोसी राज्य ओड़िशा […]
खरकई नदी के तट पर लगा मेला, महिलाओं ने की पूजा
अब पुरुषों का भी होने लगा है प्रवेश
सरायकेला : खरकई नदी के तट पर मिर्गी चिंगड़ा मेला में महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा. मकर संक्रांति के बाद शनिवार को लगने वाले मेले में सरायकेला, खरसावां, सीनी, जमशेदपुर के साथ ही पड़ोसी राज्य ओड़िशा से भी महिलाएं पहुंचीं.
इसमें पिकनिक का आनंद उठाया. खरकई नदी के बीचोंबीच स्थित मोती की तरह बिखरे बालू के कण व उभरे बड़े-बड़े पत्थर से इस रमणीक स्थल का इतिहास ही अलग है. मिर्गी चिंगड़ा का मेला राज्य में एक मात्र ऐसा मेला, जिसमें सिर्फ महिलाएं शामिल होती हैं.
शनिवार की सुबह से ही उक्त स्थल पर भीड़ लगने लगी. दोपहर तक महिलाओं की काफी भीड़ जुट गयी. हालांकि अब एक सौ वर्ष से अधिक पुराने इस मेले में अब पुरुषों को भी प्रवेश हो गया है. इससे इसकी रौनक कम हो गयी है.
स्थानीय लोगों की मानें तो यह मेला लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराना है.पहले महिलाएं सिर्फ मनोरंजन के लिए यहां आती थी और पिकनिक का आनंद लेती थीं.
गभ्रेश्वर नाथ की हुई पूजा : मिर्गी चिंगड़ा स्थान पर बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा अर्चना होती है. इस दिन महिलाएं यहां बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा अर्चना करती हैं. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से उसकी पूजा अर्चना करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. माना जाता है कि महाभारत में पांडु पुत्र के अज्ञात वास के समय यहां पर पहुंचे थे और विश्रम किया था. पत्थरों पर उभरे उनके पदचिन्ह आज भी हैं.
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