10 हजार जनजाति शिक्षकों की होगी बहाली, प्रक्रिया शुरू : रामदास सोरेन

सरायकेला के दावना मेला में मंत्री रामदास सोरेन ने कहा कि हमारी कला व संस्कृति हमारे पूर्वजों की देन है.
सरायकेला के दावना मेला में मंत्री रामदास सोरेन ने कहा कि हमारी कला व संस्कृति हमारे पूर्वजों की देन है. फोटो कैप्शन (18 आरजेएन 01) दावना मेला के मंच पर खड़े अतिथि व अन्य फोटो कैप्शन (18 आरजेएन 02) मेला नाहा: गाड़ी नाच प्रस्तुत करते कलाकार प्रतिनिधि, राजनगर कला व संस्कृति हमारे पूर्वजों की देन है, इसे बचाकर रखना होगा. कला-संस्कृति हमारी जीवनशैली को एकसूत्र में बांधती है. हमें एकजुट रखती है. उक्त बातें सरायकेला प्रखंड के छोटादावना गांव में आदिवासी जनकल्याण समिति की ओर से दावना मेला में बतौर मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने कही. उन्होंने कहा कि शहीद बाबा तिलका मांझी, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो व बिरसा मुंडा के नेतृत्व में लड़ी गयी लड़ायी का परिणाम है कि आदिवासियों के लिए एसपीटी व सीएनटी एक्ट बना. दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व में झारखंड अलग राज्य की लड़ाई लड़ी गयी. 15 नवंबर 2000 को अलग झारखंड राज्य बना. कुछ राजनीतिक दलों ने आदिवासियों के सुरक्षा कवच सीएनटी-एसपीटी एक्ट से छेड़छाड़ करने का प्रयास किया. उन्हें चुनाव में जनता ने जवाब दे दिया. मंत्री ने कहा कि राज्य में 10 हजार जनजाति शिक्षकों की बहाली होगी. इसके लिए विभाग को निर्देश दिया गया है. शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी है. कहा कि झारखंडी संस्कृति को बचाने के लिए राज्य सरकार आदिवासी वाद्ययंत्र देने की योजना बना रही है. सांसद जोबा माझी ने कहा कि मेला की भीड़ देखने से प्रतीत होता है कि समाज एकजुट है. यही एकजुटता बनाये रखना है. सरकार विकास के कार्य में लगी है.मेला में ओडिशा, बस्टमसाई व सोसोघुटू गांव के आदिवासियों ने नाहा: गाड़ी नृत्य प्रस्तुत किया. मौके पर कृष्णा बास्के, गणेश महाली, भुगलू उर्फ डब्बा सोरेन, बिशु हेम्ब्रम, भक्तू मार्डी, संजय केराई आदि मौजूद थे.
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By Prabhat Khabar News Desk
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