जब भी कोई दुर्घटना हो तो प्रभावित व्यक्तियों की जान बचाने की होनी चाहिए प्राथमिकता

Updated at : 07 Sep 2024 11:17 PM (IST)
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जब भी कोई दुर्घटना हो तो प्रभावित व्यक्तियों की जान बचाने की होनी चाहिए प्राथमिकता

सड़क सुरक्षा के विषय में जानकारी का अभाव

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साहिबगंज. डालसा रांची व डालसा साहिबगंज के तत्वावधान में शनिवार को न्यायालय परिसर स्थित लोक अदालत हॉल में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण पर जिलास्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला की शुरुआत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष अखिल कुमार, डीसी सह डालसा के उपाध्यक्ष हेमंत सती, एसपी सह सदस्य अमित कुमार सिंह, डीटीओ विष्णु देव कच्छप ने संयुक्त रूप से की. कार्यशाला में पीडीजे अखिल कुमार ने वाहन दुर्घटना दावा से संबंधित मुआवजे के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने दुर्घटना दावा वाद पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब भी कोई दुर्घटना हो तो प्रभावित व्यक्तियों की जान बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए. हादसे से पीड़ित परिवार की स्थिति काफी दयनीय हो जाती है. ऐसे में पुलिस को जांच तय समय सीमा के भीतर पूरा कर सभी दस्तावेजों को न्यायालय को सौंपने चाहिए. ताकि आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो सके और न्याय मिल सके. पीड़ित परिवार को और उचित मुआवजे की राशि का अनुमान भी एमएसीटी को लगाना चाहिए है. डीसी हेमंत सती ने कहा कि आए दिन हमें दुर्घटना मामले की जानकारी मिलती है जो काफी दुखद है. कहा कि दुखद इसलिए है क्योंकि हमें अपने-अपने स्कूल कॉलेज के कार्यकाल में सड़क सुरक्षा के विषय में जानकारी का अभाव हुआ करता था. आज जिले में हर स्कूल-कॉलेजों में सड़क सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी जा रही है. कहा कि मुख्य रूप से सड़क दुर्घटना का कारण सड़क सुरक्षा की जानकारी का न होना होती है. ज्यादातर 18 से 35 वर्ष के नवयुवक की घटनाएं सामने आती हैं, जिन्हें सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने को लेकर कार्यक्रम किये जा रहे हैं. इसके अलावा समुचित मुआवजा राशि का आंकलन भी एमएसीटी कर सकता है. एमएसीटी में पुलिस पदाधिकारियों की भूमिका अहम होती है. संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को संवेदनशील होकर जांच प्रतिवेदन समर्पित करना चाहिए. कार्यशाला में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर हिट एंड रन के मामलों के निष्पादन व उचित मुआवजा दिलवाने की प्रक्रिया और सरलीकरण को लेकर कहा गया. एसपी अमित कुमार सिंह ने कहा कि मानवता की सेवा ही पुलिस का सबसे पहला धर्म है, जिसका पालन पुलिस पदाधिकारियों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए. उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि मोटर दुर्घटना मुआवजा एक्ट से संबंधित अद्यतन जानकारी प्राप्त कर पीडितों को लाभ दिलाने की दिशा में सतत प्रयत्नशील रहें. प्राधिकार उन्हें हरसंभव सहायता देने के लिए कृत संकल्प है. कार्यक्रम को डीटीओ विष्णु देव कच्छप ने भी संबोधित किया. कार्यशाला में एडीजे प्रथम धीरज कुमार, प्राधिकार के सचिव विश्वनाथ भगत, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रेमनाथ तिवारी व डीटीओ ने दुर्घटना दावा से संबंधित कानून के बारे में विस्तार पूर्वक बताया. उन्होंने 2022 के अमेंडमेंट एक्ट को भी बताया. सड़क सुरक्षा से संबंधित व्यवहार न्यायालय परिसर में एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन भी किया गया. आम जनता से सड़क सुरक्षा के कानून को मानने और अपनाने की अपील की गयी. मौके पर प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय संजय कुमार उपाध्याय, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी धर्मेंद्र कुमार, सिविल जज राजेश श्रीवास्तव, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी तुषार आनंद, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सुमित कुमार वर्मा, पुलिस उपाधीक्षक विजय कुमार कुशवाहा, लोक अभियोजन आनंद चौबे मुख्य लीगल एड डिफेंस काउंसिल, अरविंद गोयल अधिवक्ता मुरलीधर साह, देवेंद्र कुमार सिंह, युवा अधिवक्ता रेणुका कुमारी सहित थाना प्रभारी मौजूद थे.

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