हुजूर! पैसे के बिना दयनीय होती जा रही है स्थिति, कीजिए समाधान !

Updated at : 28 Feb 2025 8:22 PM (IST)
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हुजूर! पैसे के बिना दयनीय होती जा रही है स्थिति, कीजिए समाधान !

साइबर अपराधियों की कारस्तानी का खामियाजा से भुगत रहे लोग

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पतना. ””डीसी साहेब एमकी जावालेन सरयेत्रके क़टा”” मतलब उपायुक्त सर हम सभी की समस्या का कोई समाधान कीजिये. उक्त गुहार लगा रहे हैं पतना प्रखंड के पहाड़ पर रहने वाले तिलभिट्ठा गांव के आदिम जनजाति समुदाय (पहाड़िया) के ग्रामीण. दरअसल, पहाड़ों पर रहने वाले लोगों की पेंशन की राशि पिछले 6 महीने से बैंक खाता फ्रीज होने के कारण अटकी हुई है. विदित हो कि 7 महीने पहले (14 अगस्त को) 100 रुपए की मच्छरदानी के चक्कर में साइबर ठगी के शिकार हुए गांव के करीब 20 लोग अपनी मेहनत की गढ़ी कमाई व सरकार द्वारा प्राप्त पेंशन की राशि पहले ही खो चुके हैं. साइबर ठगों ने गांव वालों के आधार नंबर व फिंगरप्रिंट लेकर एक लाख से भी अधिक रुपये की निकासी कर ली थी. ग्रामीणों ने मामले में रांगा थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. मामले में पुलिस की पहल पर बैंक ने 11 महिलाएं सहित करीब 15 ग्रामीणों का अकाउंट फ्रीज कर दिया था. जिसके बाद सभी खातों से पैसे की निकासी नहीं हो रही है. यहां तक की साइबर अपराधियों के पास गांव वालों के आधार नंबर व फिंगर प्रिंट होने के कारण गांव वाले किसी भी बैंक में अपना नया खाता तक नहीं खोल पा रहे हैं. जिस कारण से उनके जीवन यापन में काफी परेशानी हो रही है. गांव के सबसे तेज तर्रार युवक रूबेन मालतो ने बताया कि वर्तमान में फ्रिज खाते से खाताधारक एक रुपये की भी निकासी नहीं कर पा रहे हैं. इस कारण पहाड़िया महिलाओं को प्रतिमाह मिलने वाली 1000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि की निकासी से भी वंचित होना पड़ रहा है. इससे दिन-प्रतिदिन परिवार की स्थिति खराब हो रही है. कहते हैं बैंक मैनेजर लखीपुर स्थित इंडियन बैंक के ब्रांच मैनेजर जितेंद्र बास्की ने कहा कि वरीय पदाधिकारी के लिखित आदेश पर ग्रामीणों का खाता फ्रीज किया गया है. जिस कारण उन सभी खातों से किसी भी प्रकार की निकासी नहीं हो रही है. आदेश मिलते ही खाते से फ्रीज हटा दिया जायेगा. कहते हैं बरहरवा इंस्पेक्टर बरहरवा इंस्पेक्टर सुधीर कुमार पोद्दार ने कहा कि मामले में पुलिस कार्रवाई कर रही है. जिस खाते में पैसा ट्रांसफर हुआ था. वहां पुलिस ने छापेमारी की थी, लेकिन नाम-पता गलत पाया गया. ग्रामीणों की लिखित शिकायत पर ही खाता फ्रिज किया गया था.

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