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सकरात अनुष्ठान, पारंपरिक नृत्य-गीत और मांदर की थाप पर झूमे अतिथि, आदिवासी संस्कृति की दिखी झलक

Updated at : 18 Jan 2026 10:09 PM (IST)
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सकरात अनुष्ठान, पारंपरिक नृत्य-गीत और मांदर की थाप पर झूमे अतिथि, आदिवासी संस्कृति की दिखी झलक

साहिबगंज महाविद्यालय में छह दिवसीय सोहराय पर्व का भव्य समापन

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साहिबगंज

साहिबगंज महाविद्यालय परिसर में साहिबगंज कॉलेज आदिवासी कल्याण छात्रावास द्वारा आयोजित छह दिवसीय सोहराय पर्व का समापन रविवार को सकरात अनुष्ठान के साथ भव्य रूप से किया गया. समापन समारोह में आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे पूरा परिसर पारंपरिक रंग और उल्लास से सराबोर नजर आया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोरियो के पूर्व विधायक ताला मरांडी उपस्थित रहे. वहीं विशिष्ट अतिथियों में साहिबगंज कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसआरआई रिजवी, राजमहल मॉडल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह, सिदो-कान्हू के वंशज सह भाजपा नेता मंडल मुर्मू, सनातन मरांडी, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री सह गोड्डा सिविल कोर्ट की अधिवक्ता ललिता सोरेन सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल हुए. अपने संबोधन में पूर्व विधायक ताला मरांडी ने कहा कि सोहराय आदिवासी समाज का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो विशेष रूप से भाई-बहन के प्रेम, आपसी विश्वास और एकजुटता का प्रतीक है. ऐसे आयोजन हमारी परंपरा और संस्कृति को सशक्त बनाते हैं. साहिबगंज कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एसआरआई रिजवी ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति और प्रकृति के संरक्षण की जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए. वहीं डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि सोहराय पर्व प्रेम, उल्लास और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है. यह पर्व फसल कटाई की खुशी के साथ मानव और प्रकृति के सामंजस्य को दर्शाता है तथा सुख, समृद्धि, ज्ञान और एकता का प्रतीक है. सनातन मरांडी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सोहराय पर्व आदिवासी समाज को एक सूत्र में बांधता है. यह पर्व आदिवासी पूर्वजों की पहचान, संस्कृति और सभ्यता को आगे बढ़ाने का संदेश देता है तथा प्रकृति से जुड़ाव सिखाता है. इससे पूर्व पोखरिया स्थित आदिवासी कल्याण छात्रावास की छात्राओं एवं साहिबगंज कॉलेज आदिवासी कल्याण छात्रावास के छात्रों ने अतिथियों का पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज से स्वागत किया. मुख्य द्वार से बालक-बालिकाओं ने स्वागत गीत गाते हुए अतिथियों को मंच तक पहुंचाया, जहां पुष्पगुच्छ एवं गमछा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया. समापन कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक नृत्य, गीत एवं मांदर वादन की मनमोहक प्रस्तुति दी. मांदर की थाप पर पूर्व विधायक ताला मरांडी, प्रो. एसआरआई रिजवी, डॉ. रंजीत कुमार सिंह, मंडल मुर्मू समेत अन्य अतिथिगण भी झूमते नजर आये. इसके बाद आदिवासी परिधान में ढोल-मांदर की थाप पर नृत्य करते हुए जुलूस पुलिस लाइन मैदान तक पहुंचा, जहां कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया. कार्यक्रम के सफल आयोजन में छात्र नायक लाल मुर्मू, विनोद मुर्मू, अनूप टुडू, जोसेफ हेंब्रम, अनिल सोरेन, लखीराम टुडू, लक्ष्मण मुर्मू, राजेंद्र मुर्मू, रवि हेंब्रम, कन्हाई सोरेन, प्रेम मरांडी एवं संदीप मुर्मू का महत्वपूर्ण योगदान रहा. मंच संचालन मोहन हेंब्रम ने किया. इस अवसर पर डॉ. सिदाम सिंह मुंडा, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री सह गोड्डा सिविल कोर्ट की अधिवक्ता अनिता सोरेन सहित हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं, महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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