रक्षा बंधन मान-मर्यादा और भाई-बहन के नि:स्वार्थ प्रेम का प्रतीक

Published by : SUNIL THAKUR Updated At : 05 Aug 2025 7:03 PM

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रक्षा बंधन मान-मर्यादा और भाई-बहन के नि:स्वार्थ प्रेम का प्रतीक

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प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय ने किया स्नेह मिलन कार्यक्रम संवाददाता, साहिबगंज. प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय साहिबगंज शाखा के स्थानीय सेवाकेन्द्र छोटी पंचगढ, जिरवाबाड़ी, डॉ अजय कुमार सिंह एवं राजेश सिंह के मकान में मंगलवार को रक्षाबंधन का कार्यक्रम आयोजित किया गया. “सच्चा प्रेम, विश्वास और सौहार्द का पर्व रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर बंदी रहे विश्वास की आश, यह रक्षाबंधन है खास ” विषय पर आयोजित इस स्नेह मिलन कार्यक्रम में साहिबगंज शहर के विभिन्न विभागों से समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कोलकाता बारानगर सेवा केंद्र से आयी वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी किरण दीदी उपस्थित रहीं. उन्होंने रक्षाबंधन का महत्व बताते हुए कहा कि पाश्चात्य संस्कृतियों की तुलना में भारतीय संस्कृति अधिक महत्वपूर्ण व सशक्त है. भारत एकमात्र ऐसा देश है जहाँ पूरे वर्ष त्यौहार, उत्सव, व्रत, उपवास और जयंतियाँ मनाई जाती हैं. ये पर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर व ऐतिहासिक घटनाओं की स्मृति कराते हुए मन को नई चेतना प्रदान करते हैं. लेकिन आज पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव से हमारे पर्वों के आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का महत्व घटता जा रहा है. उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल धागे का बंधन नहीं, बल्कि जीवन की मान-मर्यादा और भाई-बहन के निःस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है. सामान्यतः यह पर्व लौकिक रूप में मनाया जाता है, जबकि इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक रहस्य छिपे हैं. रक्षाबंधन पर बहन भाई के ललाट पर तिलक लगाती है, जो आत्म-स्मृति का प्रतीक है. यह याद दिलाता है कि हम आत्मा रूप में भाई-भाई हैं और हमारे पिता अविनाशी परमात्मा हैं. तिलक के बाद मिठाई खिलाना इस बात का प्रतीक है कि हमारे मुख से सदैव मधुर वचन निकलें. राखी बांधना इस बात का प्रतीक है कि हम अपने भीतर की बुराइयों को परमात्मा की शक्ति से नष्ट करें और पवित्र बनें. इस अवसर पर सभी भाई-बहन इन वायदों को दोहराएं, क्योंकि इन आध्यात्मिक रहस्यों में सत्यता और पवित्रता का बल निहित है. इस अवसर पर डॉ शकुंतला सहाय, डॉ भारती पुष्पा, डॉ शहबाज आलम, डॉ एसएन पंडित, डॉ एएन चक्रवर्ती, डॉ अजय कुमार सिंह, राजेश कुमार सिंह, डॉ पूनम कुमारी, डॉ भारती कुमारी, श्रीनिनवास यादव, विनोद यादव, जयप्रकाश, कृष्णा प्रसाद, नितेश वर्मा, सेवाकेन्द्र की संचालिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बिंदु मेरी,नीतू हीदी, बी के विष्णु उपस्थित थे.

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