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साहिबगंज की सड़कों पर आवारा पशुओं का कब्जा, राहगीर हो रहे हैं हादसे का शिकार

नगर परिषद की ओर से संचालित अड़गड़ा वर्षों से है बंद

साहिबगंज. शहर के विभिन्न मोहल्ले की सड़कों पर मवेशियों का कब्जा है. ये पशु कई बार लोगों के लिए जानलेवा भी साबित हो रहे हैं. पर इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है. ताजा मामला रविवार का है. सब्जी खरीदने के क्रम में आरपीएफ जवान आवारा पशु के शिकार हो गये. आरपीएफ जवान जेके राम इतने बुरी तरह घायल हो गए कि इन्हें सदर अस्पताल से रेफर कर दिया गया. शहर के ही रहने वाले आरपीएफ के जवान जेके राम सुबह सब्जी लेने के लिए निकले थे तभी पीछे से एक सांड ने हमला कर दिया. हमले में घायल जवान को आनन-फानन में सदर अस्पताल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया. उनका इलाज शहर के एक निजी क्लीनिक में किया जा रहा है. वहीं, आरपीएफ के पुलिस निरीक्षक महेश यादव ने कहा कि रेलवे स्टेशन से लेकर पटेल चौक तक पशुओं का जमावड़ा हर समय देखने को मिलता है. वहीं, महेश यादव ने कहा कि नप प्रशासन की ओर से ऐसे आवारा पशुओं के लिए व्यवस्था होनी चाहिए. सब्जी विक्रेता मो अकरम ने आवारा पशुओं के लिए नगर परिषद द्वारा पूर्व में चलाये जा रहे अड़गड़ा को पुनः स्थापित करने की मांग की है. सामाजिक कार्यकर्ता वार्ड पार्षद गोपाल चोखानी ने भी नगर परिषद द्वारा पूर्व में संचालित अड़गड़ा को फिर से स्थापित करने की मांग की है. पिछले दो वर्षो की बात अगर की जाए तो 2 वर्षों में 6-7 ऐसी घटनाएं घट चुकी है, जिसमें हम राहगीर घायल होकर लंबे इलाज के चक्कर में पड़ चुके हैं. केस स्टडी 01 रविवार 21 सितंबर को आरपीएफ के एक जवान जितेंद्र कुमार सांड के हमले में बुरी तरह घायल हो गए. घायल जवान को सदर अस्पताल में इलाज कराया. जवान को पूरी तरह स्वस्थ होकर ड्यूटी पर वापस आने में कई दिन लग सकता है. वहीं, रविवार को ही महाजन पट्टी के निकट एक सामाजिक कार्यकर्ता अभिक्राम सिंह भी गाय के हमले में मामूली रूप से जख्मी हो गए. अभिक्राम सिंह का भी इलाज किया गया. केस स्टडी 02 लगभग एक वर्ष पूर्व भारतीय कॉलोनी निवासी एक युवक भी इसी प्रकार के आवारा पशु के हमले में घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए बाहर ले जाना पड़ा. लंबे अंतराल और अच्छी खासी रकम खर्च करने के बाद उसे युवक को बचाया जा सका. केस स्टडी 03 लगभग चार माह पूर्व मोटरसाइकिल सवार बड़ा पचगढ़ निवासी युवक भी इसी प्रकार आवारा पशु के अचानक हमले में खुद को बचाने के चक्कर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. जिसका उपचार मालदा में किया गया. यहां भी अच्छी खासी रकम खर्च हो गयी. तब युवक की जान बच पाई. अड़गड़ा को तोड़कर बना दिया कौशल विकास केंद्र : नप क्षेत्र में पूर्व से दो अड़गड़ा संचालित थी. एक पुरानी साहिबगंज में दूसरा पश्चिमी फाटक के निकट. पर वर्तमान में दोनों ही अड़गड़ा बंद है. कुछ लोगों की माने तो इन आवारा पशुओं में कुछ पशु ऐसे भी हैं, जिनके पालक तो है और यह पालक सुबह होते ही अपने पशुओं को खुला छोड़ देते हैं ताकि उनके पशु को मुफ्त में चारा उपलब्ध हो सके. ऐसे में अगर अड़गड़ा की व्यवस्था रहती है तो आवारा पशुओं की संख्या में काफी हद तक कमी होने की संभावना दिखाई पड़ती है. पर वर्तमान में स्थिति यह है की पुरानी साहिबगंज स्थित अड़गड़ा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. दूसरी ओर 2005 में पश्चिमी फाटक के निकट स्थित अड़गड़ा को तोड़कर कौशल विकास केंद्र का निर्माण किया जा चुका है. ऐसे में राहगीर की परेशानी से मुक्ति आखिर कौन दिलाए. क्या कहते हैं अधिकारी नगर परिषद में कर्मियों की कमी है, जिसके कारण आवारा पशुओं पर अंकुश लगा पाना संभव नहीं हो पा रहा है. आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटना की स्थिति में नगर परिषद द्वारा उचित मुआवजे का प्रावधान है. जल्द ही आवारा पशुओं से निजात को लेकर योजना बनायी जायेगी. – अभिषेक कुमार, प्रशासक, नगर परिषद, साहिबगंज

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