शहरी जलापूर्ति योजना पर हाइकोर्ट सख्त, अतिरिक्त मुख्य सचिव को 24 तक मांगी रिपोर्ट

Author Abdhesh singh|Edited by Priya Gupta
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. | Prabhat Khabar Network

साहिबगंज शहरी जलापूर्ति योजना में अनियमितता को लेकर झारखंड हाइकोर्ट ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को 24 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

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साहिबगंज साहिबगंज शहरी जलापूर्ति योजना को लेकर चल रहे विवाद पर झारखंड हाइकोर्ट के सख्त रुख के बाद रविवार को मुख्य अभियंता शिशिर कुमार सोरेन और सीडीओ अनिल प्रसाद ने टाउन हॉल के समीप जलापूर्ति योजना की टंकी का निरीक्षण किया. सचिव अबु इमरान और जलजीवन मिशन के सचिव शशि रंजन सोमवार को नगर परिषद अध्यक्ष रामनाथ पासवान, याचिकाकर्ता सिधेश्वर मंडल, डीसी तथा अन्य अधिकारियों के साथ टंकी सहित शहर के सभी 28 वार्डों का निरीक्षण करेंगे. इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है. सरकारी दावे और जमीनी हकीकत पर विरोधाभास करीब 70 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली शहरी पेयजल परियोजना के पूर्ण होने के सरकारी दावों और जमीनी स्थिति में विरोधाभास सामने आने पर हाइकोर्ट ने झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को स्वयं स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. इससे पहले दो जुलाई को मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारियों ने 28 वार्ड पार्षदों के साथ बैठक की थी. इसके बाद दो टीमों ने सभी 28 वार्डों का निरीक्षण कर कमियों की जानकारी जुटाई.

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सरकार और याचिकाकर्ता के दावों में टकराव सरकार ने डीडब्ल्यू एंड एस विभाग के मुख्य अभियंता निरंजन कुमार के 23 जून 2026 को दाखिल हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि हाइकोर्ट के 10 मार्च 2026 के आदेश के अनुरूप परियोजना पूरी कर ली गई है और पाइपलाइन रिसाव की समस्या का समाधान भी निर्धारित समय सीमा में कर दिया गया है. हालांकि याचिकाकर्ता सिधेश्वर मंडल ने इस दावे को चुनौती देते हुए प्रत्युत्तर दाखिल किया. इसके साथ 28 वार्ड पार्षदों में से 21 पार्षदों के बयान भी संलग्न किए गए, जिनमें परियोजना अधूरी होने, कई स्थानों पर पाइपलाइन रिसाव जारी रहने और घरों तक नल कनेक्शन नहीं पहुंचने की बात कही गई है. हाइकोर्ट का स्पष्ट निर्देश हाइकोर्ट ने कहा कि अनुपालन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है. इसलिए अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वयं स्थल निरीक्षण करेंगे. निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियंता, नगर परिषद अध्यक्ष सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहेंगे. याचिकाकर्ता के प्रतिनिधि को भी निरीक्षण में शामिल होने की अनुमति दी गई है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव यह जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंप सकते. नगर परिषद अध्यक्ष और याचिकाकर्ता को निरीक्षण की तिथि की पूर्व सूचना देने का भी निर्देश दिया गया है. 24 जुलाई तक मांगी रिपोर्ट, 30 जुलाई को अगली सुनवाई न्यायालय ने कहा कि उद्देश्य साहिबगंज की जनता को नलों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना और करोड़ों रुपये की परियोजना का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचाना है. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सार्वजनिक धन से संचालित इतनी बड़ी परियोजना को प्रशासनिक सुस्ती और अक्षमता के कारण विफल नहीं होने दिया जा सकता. अतिरिक्त मुख्य सचिव को 24 जुलाई 2026 तक अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2026 को होगी. अब शहरवासियों की नजर इस निरीक्षण और उसकी रिपोर्ट पर टिकी है कि शहरी जलापूर्ति योजना धरातल पर कितनी सफल साबित हुई है.


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