गिरफ्तारी के बाद भी कायम है पीके का खौफ

Updated at : 24 Apr 2017 12:26 AM (IST)
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गिरफ्तारी के बाद भी कायम है पीके का खौफ

साहिबगंज : अापराधिक वारदातों को बेखौफ अंजाम देनेे वाला प्रकाश मंडल उर्फ पीके की गिरफ्तारी के बाद भी क्षेत्र में खौफ बरकरार माना जा रहा है. गांव से लेकर बाजार तक पीके की गिरफ्तारी का चर्चा बना है. लोग कहते हैं कि पहले तो पीके को कोई नहीं पहचानता था परंतु अब तो लोग उसे […]

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साहिबगंज : अापराधिक वारदातों को बेखौफ अंजाम देनेे वाला प्रकाश मंडल उर्फ पीके की गिरफ्तारी के बाद भी क्षेत्र में खौफ बरकरार माना जा रहा है. गांव से लेकर बाजार तक पीके की गिरफ्तारी का चर्चा बना है. लोग कहते हैं कि पहले तो पीके को कोई नहीं पहचानता था परंतु अब तो लोग उसे पहचान लिया है. पुलिस तो अब पीके को कही दूर में भी नहीं रखा है

उसे तो जिस क्षेत्र का बेताज बादशाह कहला रहा था उसी क्षेत्र राजमहल के जेल में उसे रखा गया है. अब तो वह खुल कर रंगदारी व फिरौती से घटनाओ को अंजाम दे सकता है.

बपीके का एक बहन व भाई है, माता पिता का हो गया स्वर्गवास
कुख्यात प्रकाश मंडल की गिरफ्तारी के बाद पीके ने पुलिस के समक्ष कई राज खोले. वही अपने परिवार की जानकारी दिया कहा कि एक छोटा भाई है. जिसका नाम किशोर मंडल 32 जो केरल में मजदूरी करता है. वहीं एक बहन है जिसकी शादी साहिबगंज स्थित मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बलुआ दियारा में हुई है. जिसका नाम कविता देवी जिसकी शादी महेश मंडल से हुई है. वही माता जी वर्ष 2013 में स्वर्गवास हो गया. पिता हेमेंड मंडल की वर्ष 2014 में चल बसे.
रेखा के नातिन को पढ़ा रहा पीके
मंगलहाट निवासी नंदन मंडल गिरोह का एक सदस्य की पत्नी रेखा देवी को अपने पति की हत्या का बदला पीके को सुपारी देकर परमानंद मंडल व नंदन मंडल की हत्या कराने वाली महिला थी. जिसकी सात वर्ष नातिन को प्रकाश मंडल अपने साथ पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर गांव में रख कर पढ़ा रहा था. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रेखा की नातिन को आखिर क्यो लालन-पालन कर रहा है. वहीं रेखा व पीके का संबंध अंदरूनी तरीके से कायम तो नहीं है. इस तरह के कई सवाल खड़ा कर दिया है. चूंकि पीके के ग्रुप सफेद पोश से लेकर नकाबपोश तक की टीम बनी हुई है. पहले वह पश्चिम बंगाल से रंगदारी मंगवा था अब जेल के अंदर से ही अपना काम कर लेगा. जिससे राजमहल के आसपास के क्षेत्रों में खौफ का माहौल व्याप्त है.
खास गुर्गों को भी नहीं था पीके का पता मालूम
कुख्यात पीके उर्फ प्रकाश मंडल इतना शातिर है कि वह किसी को अपने छिपने को ठिकाना नहीं बताया था. पुलिस के अनुसार पीके के कथित सहयोग प्रभाकर मंडल व पंकज लाला तक को मालूम नहीं था कि पीके का असली ठिकाना कहां है. पंकज व प्रभाकर की गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने दोनों से पूछताछ की थी कि सिर्फ इतनी ही जानकारी मिली थी कि पीके मालदा में ही कही रहता है. दरअसल पीके दोनों से किसी काम के सिलसिले में हमेशा मालदा में ही मुलाकात करता था.
सात महीने में कुख्यात पीके ने बदले 90 सिम
कुख्यात प्रकाश मंडल उर्फ पीके दो तीन दिनों में ही अपने मोबाइल का सिम बदल देता था.
इस वजह से पुलिस को उसे दबोचने में सात महीने का वक्त लग गया. इस दौरान उसने 90 सिम बदला है. पुलिस के अनुसार चूंकी पीके उर्फ प्रकाश मंडल के सिम का लोकेशन पश्चिम बंगाल क्षेत्र में आता था.
… पीके कहीं सुपारी कीलर तो नहीं!
वर्ष 1990 के बाद जब प्रकाश मंडल को नंदन मंडल भागलपुर के सबौर थाना क्षेत्र के मीराचक से साहिबगंज स्थित मंगलहाट लाया था उस समय नंदन मंडल अपना राइट हैंड बना कर पूरे क्षेत्र में दहशत का महौल बनाया और गंगा घाट से लेकर चायना कले तक अपनी तुती बुलवाया. इसी क्रम में नंदन मंडल ने अपने ही साथी जीवन मंडल की हत्या करवा दिया. इसी बीच जीवन की पत्नी रेखा देवी उर्फ मैडम माया ने अपनी पति का बदला के लिए पीके को सुपारी दिया और पीके के सुपारी कबुल कर नंदन व उसका भाई परमानंद की हत्या कर दी. इन दोनों की हत्या के बाद पीके को कई जगह से सुपारी मिलने लगा और वह अपना काम करता रहा.
बबलू सिंह के घर हुई डकैती के दिन भी पीके राजमहल आया था
पिछले विधानसभा के मतगणना के मध्यरात्रि राजमहल थाना के निकट बबलू सिंह के घर हुई डकैती के दिन प्रकाश मंडल राजमहल आया था. सरकार को दी गयी खुफिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार प्रकाश मंडल की देखरेख में बबलू सिंह के घर लाखों रुपये के आभूषण व नकदी डकैती को अंजाम दिया गया. चूूंकि पुलिस के पास पीके का कोई फोटोग्राफ नहीं था. इस कारण पीके को पुलिस नहीं पकड़ पायी. जबकि रिपोर्ट में पीके का नाम शाकिल था. कहा यह भी जा रहा था कि पीके एक दिन पूर्व ही राजमहल आ गया था और उस घर की रेकी किया और मौका का तलाश कर डकैती जैसी घटना को अंजाम दिया.
हत्याकांड में उम्रकैद का सजायाफ्ता है पीके
पुलिस के अनुसार पांच अक्तूबर 1985 को घर में लूटपाट व उसकी मां से गलत व्यवहार से नाराज पीके उर्फ प्रकाश मंडल 45 ने रामदास मंडल की हत्या कर दी थी. इस केस में तीन साल तक जेल में रहने के बाद जब छूटा तो अपना नाम पप्पू मंडल कर लिया. हालांकि रामदास मंडल की हत्या में उसे आजीवन कारावास 20 साल की सजा हो जाने के बाद वह वहां से फरार हो गया.
फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का मामला होगा दर्ज
जिला का मोस्टवांटेड अपराधी प्र्रकाश मंडल की गिरफ्तारी के बाद पीके से बरामद हुई फर्जी वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य प्रमाण पत्रों को लेकर पुलिस विभाग फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र बनाकर कानून को धोखा देकर रह रहा था. जिसको लेकर धारा 420 व अन्य धारा के तहत मामला दर्ज कर सकती है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया में है.
क्या कहते है एसपी
पीके के सभी फाइल को जांच किया जा रहा है. जल्द ही मामले का उद्भेदन किया जायेगा. रिमांड पर लेकर पूछताछ की जायेगी. फर्जी कागजात पर प्राथमिकी दर्ज होगी.
पी मुरूगन, एसपी, साहिबगंज
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