पूर्व सांसद सहित 15 आदिवासियों की चली गयी थी जान
Updated at : 19 Apr 2017 4:23 AM (IST)
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19 अप्रैल 1985 को पुलिस व आदिवासियों के बीच हुई थी मुठभेड़ पुलिस की गोली से 8 व हथियार से मरे गये थे 7 आदिवासी पुलिस की लापरवाही से भड़के थे आदिवासी बोरियो : बांझी गोलीकांड का जिक्र होते ही यहां के ग्रामीण शिहर उठते हैं. 32 वर्ष पूर्व आज के ही दिन 19 अप्रैल […]
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19 अप्रैल 1985 को पुलिस व आदिवासियों के बीच हुई थी मुठभेड़
पुलिस की गोली से 8 व हथियार से मरे गये थे 7 आदिवासी
पुलिस की लापरवाही से भड़के थे आदिवासी
बोरियो : बांझी गोलीकांड का जिक्र होते ही यहां के ग्रामीण शिहर उठते हैं. 32 वर्ष पूर्व आज के ही दिन 19 अप्रैल 1985 को पुलिस व आदिवासियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. जिसमें पूर्व सांसद फादर एंथोनी मुर्मू सहित कुल 15 आदिवासियों की जान चली गयी थी. घटना की शुरुआत बांझी बाजार स्थित तालाब में मछली मारने से विवाद उत्पन्न हुई थी. आदिवासी ग्रामीण द्वारा तालाब में मछली मारने के दौरान तालाब के उतरी छोर पर सवैया गांव निवासी मटरू मुर्मू का शव मिला था. जिसके बाद आदिवासी आक्रोशित हो गये और बांझी संथाली गांव समीप चबूतरा में एक विशेष बैठक बुलायी.
पूर्व सांसद फादर एंथोनी की अगुआई में हुई बैठक में आदिवासी समुदाय एकत्रित होकर महाजनी प्रथा को समाप्त करने को लेकर रणनीति बनायी. आदिवासी समाज ने विरुद्ध मटरू मुर्मू की हत्या कर शव को तालाब में फेंकने का आरोप लगाया. इसके बाद ग्रामीणों ने परंपरागत तरीके से बिटलाहा प्रथा के तहत बांझी बाजार स्थित एक महाजन के घर को लूट लिया. घटना से क्षेत्र का माहौल गर्म हो गया. मामले को गर्म होता देख 19 अप्रैल 1985 को वरीय पुलिस पदाधिकारियों की उपस्थिति में बांझी डाकबंगला समीप दोनों पक्षों की एक विशेष बैठक बुलायी. जिसमें पूर्व सांसद फादर एंथोनी मुर्मू सहित कुल 5 आदिवासी ग्रामीण आदिवासी के तरफ से उक्त बैठक में शामिल हुए. बैठक शुरू होने के लगभग आधे घंटे बाद आदिवासियों भीड़ बांझी बाजार की ओर बढ़ी. आदिवासियों के झुंड को बाजार की ओर आता देख स्थानीय कुछ महाजनों व तैनात जवानों ने भी फायरिंग शुरू कर दी. जिसमें पूर्व सांसद फादर एंथोनी मुर्मू सहित कुल 15 आदिवासी मारे गये और दर्जनों आदिवासी घायल भी हुए.
बांझी गोलीकांड की 32वीं बरसी
एक सदस्यीय आयोग ने की थी जांच
बांझी गोलीकांड की जांच एक सदस्यी आयोग ने की थी. बांझी में 19 अप्रैल 1985 पुलिस फायरिंग में पूर्व सांसद एंथोनी मुर्मू सहित कुल 15 आदिवासी मारे गये थे. तत्कालीन केंद्र सरकार के निर्देश पर बिहार सरकार ने सचिव स्तर के पदाधिकारी वृषकेतु शरण सिन्हा को बांझी गोली कांड के जांच का जिम्मा सौंपा था. एक सदस्यीय जांच आयोग ने 5 जुलाई 1986 को 67 पेज की जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी.
फादर एंथोनी मुर्मू के नाम से चलता है स्कूल
बांझी कांड के कुछ महीनों बाद पाद बांझी आये सोना संताल समाज समिति के निर्माणकर्ता ने बताया कि उन दिनों क्षेत्र में लोग अनपढ़ हुआ करते थे. जिस कारण लोग अक्सर ठगी का शिकार होते थे. क्षेत्र तके शिक्षा की अलख जगाने को लेकर कांड के कुछ वर्ष बाद से पूर्व सांसद फादर एंथोनी मुर्मू के नाम से झोपड़ीनुमा स्कूल खोला गया और क्षेत्र के बच्चों को शिक्षित करने को लेकर प्रयास किया गया. आज उक्त स्कूल भवन पक्के का है और इस स्कूल से क्षेत्रीय सहित आसपास के कई गांव के बच्चे शिक्षित हो रहे हैं.
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