रिसर्च छोड़ मिसफिका ने पकड़ी पंचायत की राह
Updated at : 05 Apr 2017 5:05 PM (IST)
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-एमपी कुरैशी- दिल में कुछ करने की जज्बा हो तो कदम खुद-ब-खुद चल पड़ते हैं, उसे कोई रोक नहीं सकता. कुछ ऐसा ही हुआ पाकुड़ जिले के इलामी पंचायत की रहने वाली मिसफिका हसन के साथ. एम्स दिल्ली में कैंसर पर रिसर्च कर रहीं मिसफिका ने अपने गांव इलामी के लोगों की जिंदगी सवांरने की […]
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-एमपी कुरैशी-
दिल में कुछ करने की जज्बा हो तो कदम खुद-ब-खुद चल पड़ते हैं, उसे कोई रोक नहीं सकता. कुछ ऐसा ही हुआ पाकुड़ जिले के इलामी पंचायत की रहने वाली मिसफिका हसन के साथ. एम्स दिल्ली में कैंसर पर रिसर्च कर रहीं मिसफिका ने अपने गांव इलामी के लोगों की जिंदगी सवांरने की खातिर पंचायतों की राह पकड़ी. आइएएस बनने का ख्वाब देखने वाली मिसफिका वर्ष 2015 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पाकुड़ जिले की इलामी पंचायत से चुनाव लड़ी और लगभग 22 सौ वोट प्राप्त कर मुखिया चुनी गयी. अफसरों से फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करने वाली महज 25 वर्षीय मिसफिका के मुखिया बनने से गांव के लोगों में भी काफी खुशी है. 25 साल की यह मुखिया बॉयोटेक्नोलॉजी एक्सपर्ट ने साइंटिस्ट बनने व आइएएस का सपना छोड़ मुखिया बनने की राह अपनायी.
पाकुड़ जिले के सदर प्रखंड के इलामी पंचायत के ग्रामीणों की आस और मिसफिका के जज्बे को देख उनके माता-पिता भी बेहद खुश नजर आ रहें हैं. उसके पिता लुत्फुल शेख ने कहा कि गांव की बदहाली दूर करने के लिए बेटी के निर्णय से पहले तो उन्हें आश्चर्य हुआ, लेकिन अब लोगों के प्यार व उसके सपनों को उड़ान भरता देख उन्हें बेहद खुशी हो रही है.
गांव की सूरत बदली
मिसफिका जब छुट्टियों में घर आती थीं तो गांव की बदहाली देखकर काफी दुखी होती थी. गांव में मौजूद गरीब जिन्हें दो जून की रोटी व रहने के लिए एक छत तक नसीब नहीं है. आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल व बिजली, चलने के लिए अच्छी सड़क मुहैया नहीं होने से मन विचलित रहता था. कहती हैं कि अपने गांव की सूरत बदलने काे उसने ठानी और इसी सपने को साकार करने के लिए इलामी गांव के लोगों ने उन्हें अपना सिरमौर बनाया. कहती हैं कि भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल से जुड़कर उन्हें विधायक या सांसद बनने की इच्छा नहीं है बल्कि इन चुनौतियों के बीच आइएएस बनना ही उनका अंतिम लक्ष्य है.
यदि वे आइएएस बनती है तो अपने गांव के लिए किये गये कार्यों से मिली सीख उनके लिए मील का पत्थर साबित होगा. एक सामान्य बिजनेसमैन पिता व गृहिणी माता की इकलौती पुत्री मिसफिका शुरू से ही प्रतिभा की धनी रही है. डीपीएस पश्चिम बंगाल से 86 फीसदी अंक के साथ पास होने के बाद उन्होंने केरेली रांची से 84 फीसदी अंकों के साथ इंटरमिडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की. इसके बाद संत जेवियर रांची से 85 फीसदी अंक के साथ बायोटेक की डिग्री हासिल कर जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी दिल्ली से बायोटेक में 80 फीसदी अंकों के साथ स्नातकोत्तर किया. स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के साथ बेस्ट परफोर्मेंस के आधार पर एम्स में उनकी सीधी नियुक्ति हो गयी. यहां उन्होंने छह माह तक कैंसर पर रिसर्च किया.
झारखंड और बंगाल को जोड़ती है नदी
तोड़ाइ नदी में बांध बनवाने को ठानी
झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली तोड़ाइ नदी में बांध बनवाने के लिए उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री से बांध निर्माण की मांग की है. बांध का निर्माण होने से इलामी पंचायत, सिरसा टोला, तारा नगर, लखी नारायण, बेलडागा, इसाकपुर, संग्रेमपुर, रामचंद्रपुर सहित सौ से अधिक गांवों के खेतों को पानी मिलेगी और हर खेत लहलहा उठेगा.
इलामी बने मॉडल गांव
मिसफिका कहती हैं कि इलामी को मॉडल गांव बनाना ही उनका सपना है, जिसमें बेहतर स्कूल, महिलाओं के लिए रोजगार, युवक-युवतियों के लिए कौशल विकास से जोड़ना, ब्लाॅक से पंचायत के लोगों के लिए योजनाओं को गांवों में लागू कराना, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, मनरेगा, इंदिरा आवास योजना, राशन कार्ड आदि लागू कराना उनकी पहली प्राथमिकता है.
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