शहर से गांव तक प्राइवेट स्कूलों का क्रेज

Updated at :30 Jan 2014 2:17 AM
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शहर से गांव तक प्राइवेट स्कूलों का क्रेज

साहिबगंज : सरकारी सिस्टम व शिक्षकों की इच्छा शक्ति का अभाव व स्कूलों में पढ़ाई की सही मॉनिटरिंग नहीं होने से ग्रामीण व शहरी अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की ओर रूख कर रहे है. सरकार भले ही नौनिहालो का भविष्य संवारने के लिए सरकारी शिक्षा पर करोड़ों खर्च कर रही है. पर जिले में प्राइवेट स्कूलों […]

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साहिबगंज : सरकारी सिस्टम व शिक्षकों की इच्छा शक्ति का अभाव व स्कूलों में पढ़ाई की सही मॉनिटरिंग नहीं होने से ग्रामीण व शहरी अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की ओर रूख कर रहे है. सरकार भले ही नौनिहालो का भविष्य संवारने के लिए सरकारी शिक्षा पर करोड़ों खर्च कर रही है. पर जिले में प्राइवेट स्कूलों का क्रेज दिन प्रतिदिन बढ.ता ही जा रहा है. निजी स्कूलों में नामांकन लेने वालों की संख्या लगातार बढ. रही है. पैसे देकर बच्चों का गुणवत्ता युक्त शिक्षा में लोग अब विश्वास कर रहे है.

साहिबगंज जिले के सुदूर पहाड़ी क्षेत्र हो या समत क्षेत्र, सभी जगह निजी स्कूल खुल रहे हैं या जो पहले से खुले हैं उनमें भीड़ बढ. रही है. सरकारी स्कूलों में गरीब खिचड़ी खिलाने के लिए बच्चों को भेज रहे हैं. या बकरी चराने, मवेशी चराने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति दिलाने के लिए दाखिला लिया गया है. गांव में जिस भी अभिभावक के पास पैसा है अपने बच्चे का दाखिला प्राइवेट स्कूल में दिला रहे हैं. सरकारी शिक्षक हो, नेता हो या अफसर सभी का बच्च प्राय: प्राइवेट स्कूल में ही पढ.ता है.

क्योंकि उन्हें बच्चे की भविष्य बनाने की चिंता रहती है. जिले के प्राइवेट स्कूलों में दस प्रतिशत बच्चे अभी पढ. रहे है जिसकी संख्या लगातार बढ. रही है. झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से जिले के लगभाग सभी गांवों में स्कूल खोले गये हैं. पर इसमें छात्रों की वास्तविक उपस्थिति कम है कई स्थानों पर तो एक ही बच्च का दाखिला सरकारी व प्राइवेट दोनों स्कूलों में है.

क्या है सरकारी शिक्षा की हालत

साहिबगंज जिले में झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से शत प्रतिशत बच्चों को स्कूली शिक्षा देने का प्रयास चल रहा है. एक सरकारी स्कूल की देख-रेख व मध्याह्न् भोजन बनाने बनी है जिसमें संयोजिका व सात सदस्य हैं जो खाना बनाने के लिए हैं. इसके अलावा अभिभावक शिक्षक समिति बनाया गया है. जिसके अध्यक्ष के अलावा सचिव प्रधानाध्यापक होते है.

जिसमें कुल 16 सदस्य भी होते है. 2002 से यह समिति कार्यरत है. विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन है. जिसमें चार पदेन वार्ड सदस्य, संसद के प्रतिनिधि, एक शिक्षक व विद्यालय के प्रधानाध्यापक होते हैं. यह समिति विद्यालय का प्रबंधन का काम देखती है. निरीक्षण करने का जिम्मा जिला के अधिकारियों के अलावा, प्रखंड शिक्षा प्रसाद पदाधिकारी, अनुश्रवण दल, बीपीओ, सीआरपी, बीआरपी को दिया गया है. इसके बाद भी विद्यालय में सब कुछ ठीक नहीं चलता है.

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