गरीब क्या जाने आजादी के मायने
Updated at : 15 Aug 2016 7:03 AM (IST)
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नहीं जानते क्यों मनाते हैं स्वतंत्रता दिवस दो वक्त की रोटी के इंतजाम में कट रहे दिन साहिबगंज : गरीबी क्या होती है यह तो गरीब ही जानते हैं. क्योंकि एक दो जून की रोटी की तलाश में न जाने कितने दरवाजे पर दस्तक देना पड़ता है. साहिबगंज जिले में भी ऐसे असहाय गरीब तबके […]
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नहीं जानते क्यों मनाते हैं स्वतंत्रता दिवस
दो वक्त की रोटी के इंतजाम में कट रहे दिन
साहिबगंज : गरीबी क्या होती है यह तो गरीब ही जानते हैं. क्योंकि एक दो जून की रोटी की तलाश में न जाने कितने दरवाजे पर दस्तक देना पड़ता है. साहिबगंज जिले में भी ऐसे असहाय गरीब तबके के सैकड़ों भिखारी आपके शहर में देखने को मिल जायेंगे. जिन्हें आजादी के मायने भी पता नहीं है. कब स्वतंत्रता दिवस है कब गणतंत्र दिवस यह भी पता नहीं क्योंकि उन्हें हर सुबह उठने के बाद बस एक ही काम रहता है
कि गली-मुहल्ले व बाजारों में हर दरवाजे पर पहुंच कर खाने का जुगाड़ करना. इस संबंध में अमर रविदास, दीनाथ नाथ ने कहा कि हमलोगों के लिए स्वतंत्रता दिवस हो या कोई पर्व यह कोई मायने नहीं रखता. बस भगवान से प्रार्थना करते हैं कि जिस दरवाजे पर जायें उस दरवाजे पर दो रोटी व कुछ पैसा मिल जाये. वहीं रेलवे स्टेशन पर भीख मांग रही मोसोमात व जितनी देवी ने कही कि दीपावली व या दुर्गा पूजा हमें दो वक्त की रोटी मिल जाये. बस इसी बात से संतोष मिलेगी. आजादी तो अमीरों का पर्व है.
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